सहारनपुर। आयुष्मान मित्रों के काम नहीं करने से आयुष्मान केंद्रों पर ताला लटक गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के आयुष्मान कार्ड बनने की व्यवस्था चरमरा गई है। आयुष्मान कार्ड की त्रुटियों को ठीक कराने और नए कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी भटक रहे हैं। यहीं नहीं कार्ड बनने की गति भी धीमी हो गई।
दरअसल, शासन ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत काम कराने के लिए एक प्राइवेट कंपनी से अनुबंध किया है। अब आयुष्मान केंद्रों पर होने वाली नियुक्ति कंपनी के जरिए ही की जा रही है। इसलिए केंद्रों से आयुष्मान मित्रों को हटा दिया गया। जिले में करीब 25 आयुष्मान मित्र एसबीडी जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल और 21 सीएचसी पर काम कर रहे थे। इनके हटने के बाद जिला अस्पताल और 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आयुष्मान केंद्रों पर ताला लटक गया। इन केंद्रों पर रोजाना लाभार्थी और नागरिक आयुष्मान कार्ड बनवाने की जानकारी के लिए भटक रहे। ऐसे में लाभार्थी जनसेवा केंद्रों पर रुपये देकर आयुष्मान कार्ड बनवाने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं जहां पहले एक महीने में 10 से 12 हजार आयुष्मान कार्ड बनते थे। अब एक अप्रैल से लेकर सात अप्रैल तक करीब 1500 कार्ड ही बन पाए।
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केस नंबर एक
एसबीडी जिला अस्पताल में आयुष्मान केंद्र पर पहुंची प्रकाश विहार कॉलोनी निवासी लाभार्थी मोनिका बताती हैं कि वह पिछले चार दिनों से लगातार आ रही हैं, लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्हें पुराने आयुष्मान कार्ड को बदलकर नया कार्ड बनवाना है।
केस नंबर दो
इस्लाम नगर निवासी नवीन मौर्य ने बताया कि वह मंगलवार को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां कर्मचारी तो क्या आयुष्मान केंद्र पर ताला लटका मिला। कई दिन से आयुष्मान कार्ड के लिए भटक रहा।
एक नजर आयुष्मान भारत योजना
- 23 सितंबर 2018 योजना की प्रारंभ तिथि
- 11,21,424 आयुष्मान कार्ड बने
- 2,33,598 परिवार लाभान्वित हुए
- 94 सरकारी व निजी अस्पताल अनुबंधित
- 8,67,367 आयुष्मान लाभार्थी
- 03 रैंक आयुष्मान कार्ड बनाने में
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वर्जन
आयुष्मान मित्रों को हटाने का मामला स्थानीय स्तर का नहीं है। शासन स्तर से ही निर्देश आए हैं। शासन ने किसी कंपनी को अनुबंध किया है। जिसके माध्यम से आयुष्मान केंद्रों पर नियुक्ति की जा रही है। महिला अस्पताल में आयुष्मान कार्ड बन रहे।
- डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी