सहारनपुर। त्योहारी सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में मिलावट खोर भी सक्रिय हो गए हैं। त्योहार में मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन बाजारों में मिलावटी मिठाई सेहत को खराब भी कर सकती है। दूध और उससे उत्पादों में मिलावट की अधिक आशंका रहती है। हाल ही में आई रिपोर्ट में 70 फीसदी सैंपल फेल आए थे।
त्योहारों में दुकानों पर दिखाई देने वाली चमकीली मिठाई मिलावटी है या नहीं, इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते। त्योहारी सीजन में मिलावट खोर माेटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत बिगाड़ने से नहीं बाज नहीं आ रहे हैं। मांग बढ़ने पर मिठाइयों में मिलावट होने और घटिया व खराब मिठाइयों की बिक्री की आशंका बढ़ती है। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
इससे बचने के लिए कुछ लोग घरों में ही मिठाई के उत्पाद बना लेते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से चल रहा है। कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते मिलावट खोर सक्रिय रहते हैं। त्योहारी सीजन में तो मिलावट खोर और अधिक सक्रिय होकर आमजन की सेहत से खिलवाड़ करते हैं।
नया नहीं है जिले में मिलावटखोरी का धंधा
जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। मिलावट खोरों को मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खेलना आम बात हो गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 481 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जिनमें से 282 अधोमानक, 33 असुरक्षित और 34 मिथ्या छाप पाए गए। 292 मिलावटखोरों पर एडीएम प्रशासन कोर्ट से 68.76 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इसके बाद भी मिलावट कम नहीं हुई है।
वर्जन
दीपावली के त्योहार को देखते हुए मिलावटखोरों के विरुद्ध छापामार अभियान शुरू कर दिया है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो मिलावट की सूचना पर पहुंच रहे हैं और वहां से सैंपल भरे जा रहे हैं। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
- पवन कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन