सहारनपुर। विधवा, वृद्धा और दिव्यांगजनों समय पर पेंशन के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन यह दावे धरातल पर कितनी उतर रहे है यह जानने के लिए अमर उजाला ने इसे लेकर पड़ताल की। जहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें पेंशन के लिए पात्रों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्हें मिल रहा है तो सिर्फ आश्वासन। दरअसल, शासन ने प्रावधान किया था कि वृद्धा, दिव्यांग और विधवा पेंशन ऑनलाइन आवेदन करने के बाद 45 दिन के अंदर पात्र व्यक्ति को मिलनी शुरू हो जानी चाहिए।
पेंशन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई थी। सभी विभागों को 45 दिन के अंदर सत्यापन कर रिपोर्ट लगाने और शासन को फार्म फारवर्ड करने के निर्देश दिए थे। शासन ने पेंशन देने की प्रक्रिया को आसान किया था, लेकिन जिले में इस योजना में अनियमितता बरती जा रही है। तहसील स्तरों पर फार्म पर रिपोर्ट नहीं लग रही है न ही सत्यापन हो रहा है।
केस-1-
रामदासपुर उर्फ नागल निवासी पुष्पा ने कई माह पूर्व विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनको आज तक पेंशन नहीं मिली है। पुष्पा का कहना है कि हर बार आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है।
केस-2-
गंगोह के मोहल्ला छत्ता लखुवाला निवासी सोमती को डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी पेंशन नहीं मिली है। इस संबंध में वह कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी काट चुकी हैं, लेकिन पेंशन नहीं मिल पा रही।
केस-3-
देवबंद के गांव खेड़ामुगल निवासी सुदेश देवी ने भी विधवा पेंशन के लिए काफी समय से आवेदन किया हुआ है। सुदेश का कहना है कि पेंशन के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
केस-4-
तीतरों निवासी सर्वजीत कौर का कहना है कि उसने पति की मृत्यु के बाद विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया था। छह माह बीत चुके हैं, लेकिन उनके खाते में पेंशन नहीं आई है।
पेंशन से संबंधित 11 हजार फार्म पोर्टल पर अटके थे। इनमें से आठ हजार फार्म का सत्यापन कराकर शासन को भेज दिए गए हैं। बाकी तीन हजार फार्म भी जल्द भेजे जाएंगे।
-सुमित महाजन, मुख्य विकास अधिकारी