देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा के नेतृत्व में शुरू की गई हेल्पलाइन पर रोजेदार सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का शरीयत की रोशनी में समाधान कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब देते हुए कारी इस्हाक गोरा ने बताया कि रोजेदार की दुआ अल्लाह ताआला फौरन कुबूल करता है। रोजेदारों को चाहिए कि वह अपने, परिवार और देश की खुशहाली व तरक्की के लिए भी दुआ करें।
सवाल-मुजफ्फरनगर निवासी साइमा ने पूछा कि मेरे बेटे की उम्र आठ साल है और वे काफी कमजोर भी है मेरे ससुराल के लोग उसको रोजा रखवाने की जिद्द कर रहे हैं, क्योंकि उनके खानदान में बहुत छोटी उम्र से ही बच्चों को रोजा रखवाने का रिवाज चला आ रहा है। चाहे बच्चा कमजोर क्यूं न हो। ऐसी सूरत में शरीयत क्या कहती है, शरीयत के मुताबिक बच्चों को किस आयु में रोजा रखना चाहिए?
जवाब-कम उम्र के बच्चों को नाम या शोहरत या रस्म रिवाज की खातिर रोजा रखवाना मुनासिब नहीं है, बल्कि ये एक तरह का गुनाह है कि उनको जबरदस्ती रोजा रखवाया जाए। शरीयत के अनुसार बच्चों को रोजा रखवाने की आदत शुरू करने का बेहतर तरीका ये है कि बच्चे जब 10 या 11 वर्ष के हो जाएं तो उनसे रोजा रखवाया जाए, ताकि बालिग होते होते वह रोजा रखने के आदी हो जाएं।
सवाल- कैलाशपुर से शकिर अली ने सवाल किया कि वह रोजे की हालत में सिर पर तेल लगाना चाहता है, दोस्त कहते हैं कि रोजे की हालत में तेल लगाने से रोजा टूट जाता है। क्या ये दुरुस्त है?
जवाब-जो लोग ये समझते हैं रोजे की हालत में तेल लगाने से रोजा टूट जाता है, ये बात सरासर गलत है। बल्कि रोजे की हालत में जिस्म के किसी भी हिस्से पर तेल लगाया जा सकता है, इससे रोजे पर कोई असर नहीं आएगा।