देवबंद। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा के नेतृत्व में रोजेदारों के लिए शुरू हुई हेल्पलाइन पर दूसरे शहरों से भी लोग रमजान व रोजे से संबंधित शंकाओं का शरीयत की रोशनी में समाधान करा रहे हैं। शुक्रवार को हेल्पलाइन पर बताया गया कि रहमतों और बरकतों का महीना रमजान मुसलमानों के लिए प्रशिक्षण का महीना है। यह एक माह का रमजान 11 माह जिंदगी गुजारने की सीख देता है।
सवाल-देवबंद निवासी शाहबाज ने पूछा कि वह रोजे की हालत में आंख में सुरमा या काजल लगा सकते हैं यदि उसका असर हलक में महसूस हो रहा हो तो इससे रोजा तो नहीं टूटेगा?
जवाब-रोजे की हालत में सुरमा, काजल लगाया जा सकता है, इससे रोजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर सुरमे का असर हलक में महसूस भी हो रहा हो, तब भी रोजा सलामत रहेगा।
सवाल-मुजफ्फरनगर निवासी अर्शी ने सवाल किया कि वह सहरी में उठ नहीं पाई और पूरे दिन रोजे की नीयत भी नहीं कर सकी, लेकिन पूरे दिन भूखी प्यासी रही और कुछ खाया-पिया भी नहीं। ऐसी सूरत में शरीयत के अनुसार उसका रोजा होगा या नहीं?
जवाब-शरीयत के मुताबिक रोजा रखने के लिए नीयत करना शर्त है। शरीयत कहती है अगर किसी ने रोजे का इरादा नहीं किया और तमाम दिन कुछ खाया पिया भी नहीं, तो रोजा नहीं होगा।
सवाल-सहारनपुर से खाताखेड़ी वुडन सिटी निवासी अली जफर ने पूछा कि क्या जकात की रकम से किसी गरीब मुसलमान को दवा दिला सकते हैं?
जवाब-जी हां। जकात की रकम से किसी गरीब को दवा दिलाई जा सकती है बशर्ते दवा देते वक्त जकात की नीयत की गई हो।
कारी इस्हाक ने कहा कि हेल्पलाइन नंबर 9897399207, 9557757705, व दूरभाष नंबर 01323553040 पर दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक फोन कर अपने सवालों के जवाब शरीयत की रोशनी में लिए जा सकते हैं। ई-मेल ishaqgoragmail.com और qariishaqgoragmail.com या फिर व्हाटसअप नंबर 9897399207, 9557757705 पर भी सवाल लिखकर भेज सकता है।