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Saharanpur News: शाकंभरी देवी का प्राकट्य दिवस आज, तैयारियां पूरी

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सिद्ध पीठ मां शाकंभरी देवी में दर्शन करते जगदगुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज - फोटो : SAHARANPUR
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बेहट (सहारनपुर)। शाकंभरी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में छह जनवरी को पोष पूर्णिमा पर कल (आज) शाकंभरी जयंती (प्राकट्य पर्व) मनाया जाएगा। मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार द्वारा इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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शाकंभरी जयंती पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा 56 भोग एवं 36 व्यंजन मां भगवती को अर्पित किए जाएंगे। दुपहर बाद शंकराचार्य सिद्धपीठ पहुंचे जहां उन्होंने पूजा अर्चना की। इस दौरान राणा आदित्य प्रताप सिंह ने सपत्नीक पादुका पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान शंकराचार्य आश्रम प्रभारी संत सहजानंद जी महाराज, दद्दा आश्रम प्रभारी रामस्वरूप जी महाराज, पंडित अमन कौशिक आदि रहे। जगद्गुरु रात्रि प्रवास शंकराचार्य आश्रम में ही करेंगे और शुक्रवार की सुबह शाकंभरी जयंती के कार्यक्रम में शामिल होंगे।
शंकराचार्य आश्रम प्रभारी एवं संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सहजानंद ब्रह्मचारी जी महाराज ने बताया कि विद्वान ब्राह्मणों द्वारा किए जा रहे शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति सोमवार को होगी। सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में पोष माह की चतुर्दशी पर्व पर बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने लंबी कतार में लगकर महामाई के दर्शन किए।
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शाक वनस्पतियों को प्रकट कर अकालग्रस्त लोगों का किया संकट दूर
मां शाकंभरी को देवी दुर्गा का ही रूप माना जाता है। पोष मास की पूर्णिमा तिथि को मां दुर्गा ने मानव कल्याण के लिए शाकंभरी रूप लिया था। मार्कंडेय पुराण के अनुसार दानवों के उत्पात से त्रस्त भक्तों ने कई वर्षों तक सूखा एवं अकाल से ग्रस्त होकर देवी दुर्गा से प्रार्थना की तब मां दुर्गा ने इस अवतार में प्रकट हुईं। अपने भक्तों को इस हाल में देखकर देवी की हजारों आंखों से नौ दिनों तक लगातार आंसुओं की बारिश हुई, जिससे पूरी पृथ्वी पर हरियाली छा गई। यही देवी शताक्षी के नाम से भी प्रसिद्ध हुई एवं इन्हीं देवी ने कृपा करके अपने अंगों से कई प्रकार की शाक, फल एवं वनस्पतियों को प्रकट किया। इसलिए उनका नाम शाकंभरी प्रसिद्ध हुआ।
भारी पुलिस बल रहेगा तैनात
कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित ने बताया की शाकंभरी देवी में शांति व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 10 उपनिरीक्षक, 60 कांस्टेबल, 10 महिला कांस्टेबल एक प्लाटून पीएससी, एक गाड़ी फायर ब्रिगेड, एक एपी गारद की डिमांड की गई है।
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हिंदू और हिंदुत्व का राजनीति में इस्तेमाल बंद करें नेता
बेहट। शांकभरी। जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि राजनीतिक दलों को हिंदू एवं हिंदुत्व का राजनीति में उपयोग बंद करना चाहिए। धर्म का कार्य धर्माचार्यों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा स्वयं को हिंदू बताने पर कहा कि उनकी हिंदू धर्म के प्रति क्या प्रतिबद्धताएं हैं और उन्होंने कहां से दीक्षा प्राप्त की है, कौन से मंत्र का जाप करते हैं यह अनुसंधान का विषय है।
पत्रकारों से वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू सनातन धर्म के मानने वालों को कहा जाता है जबकि कुछ राजनीतिक लोग राजनीतिक परिपेक्ष्य में हिंदुत्व शब्द का उपयोग अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म से संबंधित मामलों में परहेज करते हुए राजनीतिक लोग अपनी नीतियों, शासन व्यवस्था, विदेश नीति आदि की तरफ ध्यान दें ताकि भारत देश विश्व में अपनी ख्याति अर्जित कर सकें। उन्होंने कहा की हिंदू समाज ने 500 साल की निरंतर लड़ाई लड़ने के बाद राम मंदिर मामले में विजय पाई है। कोई भी राजनीतिक दल हिंदू के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्य की रक्षा करते हुए उसको स्थापित करने का प्रयास करता है तो हिंदू समाज उस राजनीतिक दल को निश्चित रूप से अपना समर्थन देगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सक भले ही काले या गोरे रंग का हो वह उचित इलाज करने का सामर्थ्य रखता हैं तो ऐसे चिकित्सक का खुलकर समर्थन किया जाना चाहिए।

सिद्वपीठ मां शाकंभरी देवी में स्थापित माता की मूर्तियां- फोटो : SAHARANPUR

शाकंभरी में चतुर्दशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़- फोटो : SAHARANPUR

शाकंभरी जयंती के मौके पर सिद्वपीठ क्षेत्र में पहुंचे शंकराचार्य- फोटो : SAHARANPUR

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