पावर ग्रिड लाइन के मामले में खेतों में खंभे और लाइन डालने को लेकर किसानों के साथ चल रही असहमति पर बुलाई वार्ता में समस्या का समाधान होने की बजाय हंगामे के हालात हो गए।
पुलिस फोर्स और प्रशासन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की गई वार्ता के दौरान मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन पाई और किसानों ने अफसरों के साथ ही सरकारी तंत्र के रवैये पर रोष जताया।
इसी बीच, रामपुर मनिहारान पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका जाहिर करते हुए कुछ किसानों को हिरासत में ले लिया। इससे किसानों का रोष और बढ़ गया है।
मोहनपुर गाड़ा में पावर ग्रिड कारपोरेशन के स्टेशन कार्यालय में ही किसानों को वार्ता के लिए बुलाया गया था। फारमर्स फोरम के अध्यक्ष योगेश दहिया के साथ किसान पहुंचे।
यहां उन्होंने अधिकारी शैलेंद्र कुमार से बातचीत की। इसमें किसानों ने कहा कि पूर्व में किसानों की जमीन का प्रयोग करते समय खंभों और लाइन के लिए जो मुआवजा दिया गया। अब उतना भी नहीं दिया जा रहा है।
तीन लाख रुपये की दर से खंभे और दो से ढाई हजार रुपये की दर से लाइन से लेकर अन्य मामलों में किसानों से छलावा किया गया है। काफी देर तक चली वार्ता के बावजूद मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बनी तो किसानों ने कुछ विरोध जताया।
इसी बीच, रामपुर मनिहारान थाना प्रभारी अनिल कुमार त्यागी के साथ पुलिस फोर्स ने कुछ किसानों को हिरासत में ले लिया और उन्हें रामपुर मनिहारान थाने में ले गई।
इस कार्रवाई पर किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याएं सुनने की जगह पावर ग्रिड कारपोरेशन और सरकारी तंत्र उनका उत्पीड़न कर रहा है। यह सरासर गलत है।
हिरासत में लिए गए किसानों में अब्दुल, अरशद, जब्बार, शोएब और हारुन शामिल रहे। दूसरी ओर देर रात तक किसान मुचलकों की प्रक्रिया के चक्कर में सिटी मजिस्ट्रेट के यहां भटकते रहे।