फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जर्जर भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र

विज्ञापन
साढोली कदीम के गांव कम्बोह माजरा का आंगनबाड़ी केंद्र - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। जिले में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हो चुके हैं। कहीं पर तो आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं तो कहीं जर्जर हो चुके हैं, जबकि इनके सुंदरीकरण की योजना है। सरकार की योजना आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में विकसित करने की है।
विज्ञापन

दरअसल, जनपद में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 350 किराए पर चल रहे हैं और 150 जर्जर हो चुके हैं। हालांकि, कई भवन अच्छे भी हैं, लेकिन जो जर्जर हैं, उन्हें सुधारने की दिशा में कार्य नहीं हो रहा है। ग्राम पंचायत निधि से मनरेगा के तहत इनका सुधार होना है, लेकिन लंबे समय से स्थिति बदतर ही है। ऐसे में केंद्रों को प्री प्राइमरी के रूप में विकसित करने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। वहीं, जर्जर भवनों में बैठकर जहां विभागीय कर्मचारियों को दिक्कत उठानी पड़ती है, वहीं, कुपोषित बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी दिक्कत झेलनी पड़ती है।
बरसात में होती है दिक्कत
गांव नथमलपुर में आंगनबाड़ी केंद्र गांव के बाहर ऐसे स्थान पर बना हुआ है, जहां बरसात में पानी भर जाता है, जिससे केंद्र पर जाने के लिए रास्ता बंद हो जाता है। यहां के निवासी रमेश का कहना है कि कई बार केंद्र तक जाने के लिए पक्का रास्ता बनाने की मांग कर चुके हैं।
विज्ञापन

नहीं हो सकी मरम्मत, किराया भी नहीं हुआ स्वीकृत
देवबंद, मुजफ्फराबाद, गंगोह ब्लॉक और शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं और जर्जर भी हो चुके हैं, लेकिन इनका किराया भी पिछले दो साल से स्वीकृत नहीं हुआ। ग्राम पंचायत निधि से आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत और निर्माण होना है, लेकिन योजना अधर में ही लटकी है।
कई जगहों पर भवन जर्जर है, लेकिन कई जगहों पर अच्छे भवन भी बने हैं। प्राथमिक विद्यालयों में भी केंद्र चल रहे हैं। जल्द ही सभी भवनों की स्थिति में सुधार होगा। इसको लेकर शासन को पत्र लिखा गया है।
विज्ञापन

- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी

विकास खंड साढौली कदीम के गांव कवादपुर का आंगनवाडी केन्द्र- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें