सहारनपुर। नगर निगम के पार्किंग के ठेकों में स्टांप का फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा की गई जांच में तमाम स्टांप संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें साइट भी नहीं पकड़ पा रही है। पूरे मामले को लेकर नगरायुक्त ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। मामले में कई अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। इससे निगम में खलबली मची है।
निगम के संपत्ति विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में विभिन्न पार्किंग स्थलों पर ठेके किए गए थे। ठेकेदारों द्वारा अनुबंध की प्रक्रिया के लिए नगर निगम के संपत्ति विभाग में विभिन्न मूल्यों के ई-स्टांप लगाए गए थे। मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा पार्किंग के ठेकों के दस्तावेजों के साथ लगाए गए स्टांप संदिग्ध नजर आए, जिसके बाद उन्होंने संबंधित एप वेबसाइट के माध्यम से स्टांप की जांच की। जांच में स्टांप के मूल्य एवं क्रेता के विवरण में गड़बड़ी पाई गई थी। संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद अधिकारी इस निर्णय पर पहुंचे कि संबंधित अधिकारी द्वारा ठेकेदारों से उचित मूल्यों के स्टांप लिए बिना ही ठेकों की प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई। एक तरह से अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर ठेके छुड़वा दिए। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के पत्र के बाद नगरायुक्त ने जांच समिति गठित कर दी है। समिति में अपर नगरायुक्त मृत्युंजय, अपर नगरायुक्त एसके तिवारी, निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमरेंद्र गौतम, लेखाधिकारी राजीव कुशवाहा शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों और लिपिकों में खलबली है।
जांच में हो सकता है बड़ा खुलासा
स्टांप की कूटरचना में ठेकेदारों व कई अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। इससे न केवल उत्तर प्रदेश सरकार, बल्कि नगर निगम को भी मोटे राजस्व की हानि पहुंचाई गई है। जांच के बाद मिलीभगत का खुलासा होगा। जिसके बाद संबंधित पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
मुकदमा दर्ज करने की मांग
कमेला रोड पर पशु मंडी के ठेके की नीलामी में भी ठेकेदार द्वारा 100 रुपये का स्टांप प्रस्तुत कर अनुबंध कराया गया था, जबकि 100 रुपये का स्टांप पर्याप्त नहीं है। ऐसे में नगर निगम के प्रभारी अधिकारी संपत्ति की ओर से जिला मजिस्ट्रेट (स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन) को पत्र लिखकर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध स्टांप राजस्व वसूली के लिए मुकदमा कायम करते हुए जरूरी कार्रवाई करने की मांग की गई है।