सहारनपुर के कोषागार पर पेंशन के फार्म का सत्यापन कराने एंबुलेंस से पहुंचे शिव कुमार गौतम वृद्ध
सहारनपुर। स्थान : जिला कोषागार परिसर। वहां पर खड़ी एक एंबुलेंस के अंदर स्ट्रेचर पर लेटा दामोदरपुरी कॉलोनी निवासी 85 वर्षीय शिवकुमार गौतम, जो उम्र के आखिरी पड़ाव में गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए बेटे और पोते के साथ पहुंचा था। स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे शिवकुमार गौतम को पेंशन का सत्यापन फार्म दिया गया, जिसके बाद बुजुर्ग ने कंपकंपाते हाथों से अंगूठा लगाया। तब जाकर माना गया कि शिवकुमार गौतम अभी जीवित हैं। यह केवल शिवकुमार गौतम के साथ ही नहीं, बल्कि कई अन्य बुजुर्गों के साथ का वाकया है, जो पेंशन का सत्यापन फार्म जमा करने के लिए पहुंचे थे, दरअसल, वर्ष में एक बार पेंशन का सत्यापन फार्म भरकर जिला कोषागार में जमा कराना होता है। जिससे विभाग को यह पता चल सके कि पेंशनधारक जिंदा है या फिर उसका निधन हो गया।
इन बुजुर्ग महिलाओं को भी देना पड़ा जिंदा होने का सबूत
- शेरपुर गांव से 70 वर्षीय कांति पत्नी कृष्णलाल भी खुद के जीवित होने का सत्यापन फार्म जमा करने के लिए कार्यालय पहुंची थी। कांति ने बताया कि जिंदगी के आखिर दौर में पेंशन का ही सहारा है, जिसे लेने के लिए भटकना पड़ता है। कांति का कहना है कि जिंदा होने के बावजूद जिंदगी का सबूत देना पड़ रहा है। सुबह पहले फार्म लेने के लिए कतार में लगना पड़ा और फिर उसे जमा कराने की जद्दोजहद उठानी पड़ी।
- फंदपुरी गांव से पहुंची रामरति पत्नी मोहन सिंह भी इसी काम के लिए कार्यालय पहुंची। रामरति ने बताया कि हर बार साबित करना पड़ रहा है कि मैं जीवित हूं। पेंशन तो मिल रही है, लेकिन उसके लिए जो परेशानी झेलनी पड़ती है उसका कोई समाधान नहीं हो रहा।
- विमला के पति नगीन चंद बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। जिनके बाद उनकी पत्नी विमला को पेंशन मिल रही है। विमला का कहना है कि सरकार को सत्यापन फार्म जमा कराने की छूट इस तरह देनी चाहिए जिससे घर बैठे किसी के माध्यम से यह इसे जमा कराया जा सके। सुबह से दोपहर तक भटकने के बाद फार्म जमा हुआ।