सहारनपुर। वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट आम आदमी को राहत देने वाला नहीं नजर आ रहा है। एक्सपर्ट की मानें तो किसानों पर केंद्रित आम बजट में नौकरीपेशा बिल्कुल नजरअंदाज सा है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के जरिए 40 हजार रुपये के छूट की घोषणा की गई है। मगर, ट्रांसपोर्ट और मेडिकल में मिलने वाली छूट को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा बेसिक आयकर सीमा के स्लाट में भी बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा एजूकेशन सेस को तीन फीसदी से चार फीसदी कर दिया गया। ऐसे में नौकरीपेशा वर्ग के लिए यह बजट सामान्य ही है। शहर के सीए मुकेश गोयल के मुताबिक इस बजट ने इनकम टैक्स को कस दिया है। इससे आम आदमी को कोई फायदा नहीं मिलता दिख रहा है। नौकरीपेशा से लेकर सभी वर्गों को टैक्स में किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। माना जा रहा था कि बेसिक छूट 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये होगी, मगर इसमें लोगों को निराशा ही हाथ लगी। एजूकेशन सेस में भी एक फीसदी की बढ़ोत्तरी से आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। बजट में नौकरीपेशा वर्ग को 40 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन दी गई है। मगर, पहले मिल रहे ट्रांसपोर्ट और मेडिकल में मिल रही छूट समाप्त कर दिया गया है। सीए नितिन पहवा भी बजट को आम आदमी के लिए अच्छा नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि कॉरपोरेट कंपनी को नार्मल टैक्स 30 फीसदी देना होता था। यह नियम अब तक 100 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनी के लिए यह टैक्स 25 फीसदी था, जिसे इस बजट में 250 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए लागू किया गया है। इससे छोटी कंपनियों इस लाभ से अछूती ही रहेंगी। रोजमर्रा की चीजों की कीमत जीएसटी लागू होने से प्रभावित हैं और उसमें किसी तरह की राहत नहीं है।