सहारनपुर। भारत सरकार ने 2025 तक टीबी मुक्त का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन जनपद में टीबी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ मृतकों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। दो साल के अंदर जहां टीबी के 21,197 मरीज मिले तो 580 मरीजों की जान गई। इस साल भी अब तक 26 मौत हो चुकी हैं।
वर्ष 2021 में टीबी मरीजों की संख्या 9497 थी, वहीं वर्ष 2022 में इन रोगियों की संख्या बढ़कर 11,700 तक रही। वर्ष 2023 में अब तक 4916 मरीज सक्रिय हैं। यह संख्या अभी और बढ़ेगी। विभाग टीबी की पुष्टि होने के बाद हर महीने पांच सौ रुपये का भुगतान करता है, साथ ही चिकित्सक को भी पांच सौ रुपये का भुगतान हर मरीज के हिसाब से होता है। पोषण और दवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद टीबी मरीजों की संख्या कम नहीं हो पा रही है। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही।
वर्ष 2021 में टीबी से 239 मरीजों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2022 में 341 की मरीजों की जान चली गई। मरीजों की संख्या बढ़ने की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, साथ ही लोग बीमारी के प्रति सचेत हुए हैं, जो खुद सामने आकर जांच करा रहे हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर बीमारी को लेकर लोगों की लापरवाही बरतना भी इसके लिए जिम्मेदार रहा है।
टीबी से डरें नहीं, नियमित कराएं इलाज
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार सिंह ने बताया कि टीबी जानलेवा उस स्थिति में होती है, जब मरीज इलाज में लापरवाही बरतता है और बीच में ही इलाज छोड़ता है। मरीज यदि चिकित्सक की सलाह से छह से नौ माह तक नियमित इलाज कराए तो टीबी को आसानी से मात दी जा सकती है।
एक नजर में टीबी आंकड़े
वर्ष मिले टीबी मरीज ठीक हुए एमडीआर मौत
2021 9497 6819 24 239
2022 11,700 6034 331 341
2023 4916 26
टीबी के लक्षण
-तीन सप्ताह या अधिक समय से खांसी
-वजन कम होना, भूख में कमी आना
कभी-कभी थूक में खून आना
-बुखार विशेषत: रात के समय
बचाव के तरीके
- मास्क पहनें या हर बार खांसने और छींकने से पहले मुंह को ढकें
-मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह डस्टबिन में डाल दें
आज गोद लिए जाएंगे टीबी के 210 मरीज
स्वयं सेवी संस्थाएं या कोई भी व्यक्ति टीबी के मरीजों को गोद ले सकता है। विश्व टीबी दिवस पर जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी सैनिटोरियम में कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संस्थाएं टीबी से ग्रसित 210 मरीजों को गोद लेंगी। 1600 मरीज गोद लिए जा चुके हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच होती है।