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Saharanpur News: वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात में 40 प्रतिशत तक गिरावट

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वुड कार्विंग के डिजाइन तैयार करती महिलाएं
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- यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते पश्चिमी देशों में बढ़ी महंगाई का पड़ा निर्यात पर असर
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- ऑर्डर हुए कम, कई निरस्त और होल्ड पर हो गए
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूक्रेन-रूस युद्ध के लंंबा खिंचने का असर जनपद से होने वाले वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात पर पड़ रहा है। युद्ध के चलते पश्चिमी देशों में बढ़ी महंगाई के कारण जनपद से होने वाले वुड कार्विंग उत्पादों के न सिर्फ नए निर्यात ऑर्डर कम आ रहे हैं, बल्कि इनमें कई कैंसिल और होल्ड पर भी हो गए हैं। इससे निर्यात में 40 फीसदी तक की कमी आ गई है।
जनपद के वुड कार्विंग उत्पादनों को दुनिया भर में खासा पसंद किया जाता है। इसके चलते विश्व के कई देशाें में वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात होता है। जनपद में वुड कार्विंग उत्पादों का वार्षिक कारोबार करीब 1400 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें से लगभग 1100 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात विदेशों में होता है, लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते अमेरिका और यूरोपीय देशों में हुई महंगाई का असर काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर पड़ा है। जनपद से सबसे अधिक निर्यात इन्हीं देशों में होता है। एक आकलन के अनुसार वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात में करीब 40 फीसदी की कमी आई है।
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पश्चिमी देशों में होता है सबसे अधिक निर्यात
जनपद से वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। इसमें अमेरिका में 40 से 45 प्रतिशत, यूरोपीय देशों में 20 से 25 फीसदी और मध्य पूर्व के देशों में 10 से 15 प्रतिशत निर्यात होता है।

बोले निर्यातक
रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देश महंगाई की चपेट में आ गए हैं। इसके कारण पश्चिमी देशों में होने वाले काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में करीब 60 फीसदी तक गिरावट आई है। वुड कार्विंग उत्पाद मनुष्य की अनिवार्य जरूरतों में नहीं आते हैं। इसलिए निर्यात ऑर्डर कम हैं, कई होल्ड पर हैं और कई कैंसल भी हो गए हैं। सरकार इस क्षेत्र को बचाने के लिए निर्यातकों का सहयोग करे। - परविन्दर सिंह, निर्यातक।
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वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात में 35 से 40 फीसदी तक की कमी आई है। निर्यातकों के पास अभी क्रिसमस के ऑर्डर अंतिम दौर में चल रहे हैं। आगे निर्यात ऑर्डर कम हैं। यह अमेरिका और यूरोपीय देशों में बढ़ी महंगाई का परिणाम है। निर्यात में गिरावट का वुड कार्विंग से जुडे अन्य उद्योगों पर भी इसका असर पड़ रहा है। - सोम गोयल, निर्यातक
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निर्यात में आई कमी के चलते कई वुड कार्विंंग उद्योग बंदी की कगार पर हैं। कई उद्यमियों ने अपने यहां कारीगरों की संख्या कम कर दी है। इसका निर्यातकों पर विपरीत असर पड़ रहा है। सरकार यदि निर्यातकों को बचाना चाहती है तो उनको दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर कम करे। आरिफ खान, निर्यातक एवं महासचिव, हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन।
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