‘काला गुब्बारा’ और ’यह उपसंहार नहीं’ का लोकार्पण
सहारनपुर। साहित्यिक संस्था विभावरी और समन्वय ने संयुक्त रूप से हरिराम पथिक की काव्य कृति ‘काला गुब्बारा’ और ‘यह उपसंहार नहीं’ का लोकार्पण किया।
दीवानी कचहरी पुल के पास स्थित सभागार में आयोजित लोकार्पण समारोह में पद्मश्री भारत भूषण, डा. श्याम निर्मोही और डा. उमाकांत शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। हेमंत शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डा. उमाकांत शुक्ल और डा. श्याम निर्मोही ने दोनों काव्य कृतियों को पाठक के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। डा. वीरेंद्र आजम ने कहा कि ‘काला गुब्बारा’ व्यक्ति को इंसान बनाने का सांचा है। इन कविताओं की विशेषता यह है कि काव्य रचना में बोध कथाएं घायल नहीं हुई हैं। इनमें बाल सौंदर्य और बचपन की खुशबू है। इससे बोध कथाओं को ताजगी मिली है। हरिराम पथिक ने वचन दिया कि समाज के उत्थान के लिए वह अंतिम सांस तक काव्य रचना के लिए सक्रिय रहेंगे। डा. एसएस कुमार, प्रोफेसर ओपी गौड़ और बालेश्वर जैन ने हरिराम पथिक को शुभकामनाएं दी और उन्हें सम्मानित किया।