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खुदा को राजी करने के लिए हलाल माल से करें कुर्बानी

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बेहट (सहारनपुर)। संसारपुर स्थित मदरसा फैज रहमानी के नाजिम मौलाना मुफ्ती उजैर ने कहा, कि कुर्बानी बहुत बड़ी इबादत है। उसको खुदा को राजी करने के लिए करें, जिस जानवर की कुर्बानी करें, वह स्वस्थ और साफ सुथरा होना चाहिए। कुर्बानी हलाल माल से करें। छोटे जानवर बकरा आदि का ही एक हिस्सा हो सकता है, जबकि बड़े जानवर के सात हिस्से किए जा सकते है। कुर्बानी का मकसद गोश्त खाना नहीं है। इसलिए कुर्बानी का गोश्त गरीबों में भी तक्सीम करना चाहिए। कुर्बानी हजरत आदम के बेटों से शुरू हुई और उम्मत में चलती रही, लेकिन बड़ी शुरुआत हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम से हुई। उन्होंने खुदा के हुक्म से अपने प्यारे बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम के गले पर छुरी चलाई, लेकिन छुरी गले को नहीं काट सकी। खुदा ने जन्नत से एक दुम्बा हजरत जिब्राइल के जरिए भेजा। उसको हजरत जिब्राइल ने कुर्बान किया। वहां से कुर्बानी की शुरुआत हुई, इसलिए जो लोग मालदार, साहिबे निसाब है, उन्हें 61 तोला चांदी या उसकी कीमत उसके पास हो, उसे कुर्बानी जरूर करनी चाहिए, वरना गुनहगार होगा। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने फरमाया है, जो लोग गुंजाइश रखते हैं, फिर भी कुर्बानी न करें, वह हमारी ईदगाह में न आएं। उन्होंने कहा, कि कुर्बानी के दिन हमें कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले हमें ख्याल रखना चाहिए, कि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत ना हो। कुर्बानी के दौरान खून नालियों में न बहें। अवशेषों को खुले में ना फेंके। खुलेआम कुर्बानी ना करें।
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