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कुरआन पढ़ना और सुनना सबसे बड़ा पुण्य का काम

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चिलकाना (सहारनपुर)। रमजान में कुरआन पढ़ना और सुनना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। कुरआन को पढ़ने एवं सुनने वाले ही जन्नत के भागीदार होंगे। यह विचार मौलाना सादिक ने मोहल्ला मजहर हसन में नव निर्मित मस्जिद मस्जिद-ए-आयशा में तरावीह के दौरान कुरआन पाक पूरा होने पर एक मजलिस को खिताब करते हुए रखे। उन्होंने कहा कि हर मुसलमान को कुरआन और हदीस के बताए रास्ते पर चलना चाहिए और जितनी भी हो सके अधिक से अधिक कुरआन की तिलावत रमजान माह में की जानी चाहिए। जो शख्स ऐसा करेगा वह जन्नत का भागीदार बनेगा। मौलाना गयूर हुसैन मजाहिरी ने कहा की अपने मां-बाप तथा अपने गरीब पड़ोसियों की सेवा करना तथा रमजान के महीने में उनके खाने-पीने, रहन सहन का ध्यान रखना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। इस दौरान मौलाना मुआविज, मौलाना इस्माइल हुसैन, कारी मसरूर, मौलाना अताउर्रहमान, हाफिज मो. राशिद, डा. शहजाद आलम हासमी, हाजी सोनू कुरैशी, यामीन कुरैशी, मुजीबुर्रहमान बेग, गुलबहार कुरैशी, गुलाब कुरैशी, गुलजार बेग, आजम मिर्जा, नदीम मिर्जा आदि मौजूद थे। तरावीह में हाफिज मो. कौसर ने तिलावत तथा हाफिज सैय्यद मो. जिकरिया हासमी ने शामयात कराई।
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