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अंतिम समय में ईश्वर को याद करना मुक्ति का उपाय

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नकुड़ (सहारनपुर)। कथावाचक पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि अंत समय आने पर मनुष्य को कुछ ना कुछ ऐसा यत्न करना चाहिए जिससे अंतिम समय में वह ईश्वर को याद कर सके। अंतिम समय में ईश्वर को याद करना ही मनुष्य की मुक्ति का एकमात्र उपाय है। नगर के श्री रामलीला भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञानामृत सप्ताह के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल ने बताया जिस समय राजा परीक्षित को यह पता चल गया कि आज से सातवें दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी तब उन्होंने भगवान शुकदेव से प्रश्न किया कि अंतिम समय में मनुष्य का क्या कर्तव्य होना चाहिए। तब भगवान शुक देव ने राजा परीक्षित को बताया कि मरते हुए मनुष्य का कर्तव्य यह होना चाहिए कि वह भक्ति ज्ञान वैराग्य स्वाध्याय आदि किसी भी माध्यम से अपने अंतिम समय को ऐसा बना ले कि मरते समय उसे भगवान की याद रहे। यदि मरते समय मनुष्य को किसी भी रूप में भगवान की याद रहेगी तो उसका अंतिम समय सुधर जाएगा और वह जन्म मरण के बंधन से मुक्ति पाकर इस जीवन मरण के चक्रव्यूह मुक्त हो जाएगा। आचार्य ने कथा का सार बताते हुए कहा की मनुष्य को प्रत्येक स्थिति में भगवान का स्मरण रखना चाहिए। सुख हो या दुख, उसे ईश्वर को भूलना नहीं चाहिए। इसी में मनुष्य का कल्याण है। कथा में श्री राधे गोविंद सेवा समिति के संयोजक मनोज गोयल, अध्यक्ष राजन शर्मा, महामंत्री मनोज धीमान, संरक्षक हरीश गर्ग, चंद्रशेखर मित्तल, सुखबीर सहगल, विजेंद्र नारायण, वरुण मित्तल, आलोक जैन, मामचंद गोयल, मनोज शर्मा, अनूप शर्मा, संदीप कश्यप, एडवोकेट उधम सिंह, जयपाल कश्यप, रकम सिंह कश्यप उपस्थित रहे।
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