अगर तू काम औरों के न आया, तेरी ये जिंदगी बेकार होगी
सहारनपुर। बेहट रोड स्थित रसूलपुर गांव में गंगा-जमुनी तहजीब पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया।
डा. इरशाद सागर के निवास स्थान पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता रुड़की से आए शायर अनीस मेरठी और संचालन बिलाल सहारनपुरी ने किया। हाजी इलियास अलम ने कहा भलाई कर, भलाई ही मिलेगी, कहां कोशिश तेरी बेकार होगी, अगर तू काम औरों के न आया, तेरी ये जिंदगी बेकार होगी। डा. मोहम्मद अमजद ने कहा कि हुक्म तो मान लिया बाप का बेटे ने, मगर उसके चेहरे पर उभर आए हैं तेवर कितने। हरिराम पथिक ने कहा खेल वादों का चलेगा कब तलक, झूठ अब सच को छलेगा कब तलक। शरद अकमली ने कहा कि वो जिनको हमने सिखाया है बोलने का हुनर, उन्हीं के सामने हम बेजुबान ठहरे हैं। डा. विजेंद्र पाल शर्मा ने कहा कि आओ अच्छा बुरा क्या है ढूंढे अपने दिल के किताबखाने में। बिलाल सहारनपुरी ने कहा कि क्या बताएंगे उन्हें, ये भी बताते जाना, लोग जब रूठ के जाने का सबब पूछेंगे। डा. इरशाद सागर ने कहा कि गुफ्तगू में आपका मैं जिक्र क्या करने लगा। तन-बदन जैसे मेरा महका हुआ है आजकल। अनीस मेरठी ने कहा कि वक्त से पहले मौत नामुमकिन, शाम से पहले शब नहीं होती, अब तो तकलीफ तब पहुंचती है, कोई तकलीफ जब नहीं होती।