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अयोध्या में श्रीराम का जन्म, लंका में रावण का आधिपत्य

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नकुड़ (सहारनपुर)। नगर में चल रही रामलीला के दूसरे दिन अयोध्या में श्रीराम जन्म और रावण द्वारा लंका पर अधिग्रहण करने का सशक्त मंचन किया गया।
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नगर के श्री रामलीला भवन में आयोजित श्री रामलीला मंचन के दूसरे दिन रावण और उसके भाई कुंभकरण, विभीषण ने ब्रह्मा जी की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी से तीनों भाईयों ने वरदान प्राप्त किये। रावण द्वारा लंका पर कब्जा करने और रावण एवं मंदोदरी विवाह के संवादों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। उधर, अयोध्या नगरी में राजा दशरथ के यहां भगवान श्रीराम जन्म का मंचन हुआ। श्रीराम के जन्म पर पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मेघनाथ द्वारा देवराज इंद्र के साथ युद्ध के संवादों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। इसके पूर्व दूसरे दिन की लीला का उद्घाटन समाजसेवी बशेश्वर गोयल, डा. वीरेंद्र शर्मा व राकेश भारद्वाज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कमेटी के प्रधान भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि नकुड़ नगर में चैत्र मास में रामलीला की अद्भुत परंपरा है, क्योंकि यहां रावण वध नहीं, बल्कि राम जन्म को आधार बनाकर रामलीला का मंचन किया जाता है। इस अवसर पर श्रीराम लीला महोत्सव के महामंत्री सुरेश नामदेव, श्रीराम लीला मंडल के निर्देशक पवन कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजय सिंघल, सह महामंत्री सोहन गुप्ता, अनिल गोयल, विजेंद्र नारायण, अनुज मित्तल, मनोज धनगर, नरेश धीमान, सचिन शर्मा, सुनीत कर्णवाल, आदि उपस्थित रहे।
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