उन्होंने आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की। जबकि बचाव के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी प्रमोद कुमार और रिंकू को दोषी करार देते हुए 20 साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।