रामपुर। हत्या के आरोप महिला और उसके दो साथियों पर साबित नहीं हो सके। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में तीनों को बरी कर दिया है।
घटना छह साल पहले की है। 20 नवंबर 2016 को बमनपुरी स्टेडियम के पीछे जंगल में ग्रामीण का शव मिला था। मृतक की शिनाख्त मिलक कोतवाली क्षेत्र के ग्राम श्यामपुर निवासी मनजीत वाल्मीकि के रूप में हुई थी। गंज कोतवाली पुलिस ने मृतका की पत्नी विमलेश की तहरीर पर इस मामले में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने मृतका की पत्नी समेत थाना शहजादनगर के ग्राम मौलिया की मढ़ैया मोहसिनपुर का मझरा निवासी दारा सिंह और सत्यपाल सिंह को गिरफ्तार किया था। बाद में हत्या के अलावा एससीएसटी एक्ट की धारा भी बढ़ाई गई थी। विवेचना तत्कालीन सीओ सिटी दिनेश कुुमार शुक्ला ने की। विवेचना के बाद तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 22 गवाह पेश किए। महिला और उनके साथियों के बीच मोबाइल की बातचीत की काल डिटेल भी कोर्ट में पेश करते हुए तीनों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की थी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नजर अब्बास का कहना था कि घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। सिर्फ काल डिटेल रिकार्ड के आधार पर तीनों को दोषी नहीं माना जा सकता है। बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। संवाद