जिले में स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था किस कदर बदहाल है? इसका खुलासा तब हुआ, जबकि डीएम ने खुद बहजोई के गांव राजपुर में पहुंचकर सरकारी अस्पताल व स्कूल का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल में डाक्टर नहीं थे और स्कूल में शिक्षिका।
इससे डीएम ने सीएमओ समेत दूसरे अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए तीन दिन में व्यवस्थाओं में सुधार कराने के निर्देश दिए। करीब आधा-आधा घंटे के निरीक्षण के बाद डीएम सरकारी अस्पताल व स्कूल से वापस लौटे। इस बीच कई अधिकारियों व कर्मचारियों का जमावड़ा रहा।
गुरुवार को सुबह 10.38 बजे विकासखंड के गांव राजपुर पहुंचे जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खामियां मिलीं। सबसे पहले परिसर में बड़ी-बड़ी घास उगी मिली। आसपास गंदगी थी। सरकारी हैंडपंप के आसपास झाड़ियां थीं।
प्रभारी चिकित्सक नदारद थे। स्टाफ हाजिरी पंजिका देखी। एक-एक कर लेबर रूम, डिस्पेंसरी, स्टोर व अन्य कई कक्ष समेत शौचालय देखे। सभी में गंदगी थी। जाले लगे हुए थे। विद्युत उपकरण क्षतिग्रस्त थे। यह देख डीएम ने सीएमओ डा. अमिता सिंह समेत दूसरे स्वास्थ्य अधिकारियों से नाराजगी जताई।
डीएम ने कहा कि तीन दिन में पूरी व्यवस्था में सुधार कराया जाए। सहायक जिला सूचना अधिकारी मिथलेश यादव समेत एसीएमओ प्रभाकर बंधु, डिप्टी सीएमओ डा. बीएल बिराटिया, डीपीएम संजीव राठौर, बीपीएम वरुण मिश्रा व सहायक शोध अधिकारी महेश चंद्र गौतम मौजूद रहे।
करीब आधा घंटे के निरीक्षण के बाद डीएम ने गांव के प्राथमिक विद्यालय का रुख किया। विद्यालय के बाहर नाली की स्लैब क्षतिग्रस्त थी। प्रभारी शिक्षिका नदारद थी। डीएम ने बच्चों से पढ़ाई समेत दूसरी जानकारियां लीं। मौजूद शिक्षामित्र से भी पूछा।
स्कूल के आसपास गंदगी थी। बाउंड्री वॉल व शौचालय क्षतिग्रस्त मिले। एक कक्ष में ताला लगा हुआ मिला। यहां भी डीएम ने तीन दिन में सुधार कराए जाने के सख्ती से निर्देश दिए। इसके बाद डीएम आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों से मिले। बच्चे मैदान में दड़ी पर बैठे थे। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं से जानकारी लेने के बाद डीएम वापस लौट आए।