रामपुर। बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए नई शिक्षा नीति की तैयारी होने लगी है। नई शिक्षा नीति में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को जोड़ा जाएगा। विभाग ने इस साल इन बच्चों के लिए पुस्तकें नहीं मंगवाई हैं। कक्षा चार से आठ तक के बच्चों के लिए पुस्तकों की डिमांड भेजी गई है। पुस्तकें फरवरी माह तक आ जाएंगी और मार्च में विद्यालयों में इनका वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
पहले पूरे सत्र में बच्चे पुस्तकों के लिए परेशान रहते थे। इस बार शासन ने यह समस्या खत्म कर दी है। बच्चों के हाथों में ग्रीष्मकालीन से पहले पुस्तकेें होंगी। आगामी शिक्षा सत्र 2023-24 में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू किया जाएगा। नई शिक्षा नीति रोजगार परक शिक्षा पर आधारित होगी। इसकी शुरूआत कक्षा एक से की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के अनुपालन में काम करना शुरू कर दिया है। बेसिक के विद्यालयों को पुस्तकें शासन की ओर से आवंटित होती हैं। सभी कक्षाओं की पुस्तकों का आर्डर एक साथ होता है। इस बार विभाग ने कक्षा चार से आठ तक की पुस्तकों का आर्डर भेजा है। कक्षा एक से तीन तक की पुस्तकें नहीं मंगवाई हैं। ये नई शिक्षा नीति के अंतर्गत आएंगी और इनके पाठ्यक्रम में बदलाव होने की बात कही जा रही है। पहले एक से ही पाठ्यक्रम की पुस्तकें भेजी जाती थीं, लेकिन अब उनमें बदलाव होगा। निजी विद्यालय भी जल्द ही नई व्यवस्था लागू करेंगे। बताया जाता है कि नई शिक्षा नीति में एनसीईआरटी की पुस्तकों को बढ़ावा मिल सकता है। इसमें बच्चों को शिक्षा देने के लिए अलग तरीकों का इस्तेमाल भी होगा। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ना सिखाया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को भी शुरुआत से शिक्षा से जोड़ा जाएगा। जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1599 विद्यालय सहित कस्तूरबा, एडेड, मदरसा में पढ़ने वाले तकरीबन 2 लाख बच्चों को पुस्तकें दी जाएंगी।