रामपुर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) द्वारा जारी पीसीएस-2023 के परीक्षा परिणाम में शाहबाद की कीर्ति सागर ने भी सफलता प्राप्त की है। कीर्ति का चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ है। उन्हें इस कैटेगरी में 67वां स्थान मिला। कीर्ति ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां गीता रानी को दिया। कीर्ति की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। शाहबाद के मोतीपुरा गांव निवासी शिक्षिका गीता रानी के पति सुभाष सिंह का निधन 2005 में हो गया था। जिसके बाद दो बेटी कीर्ति सागर और संजना सिंह की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई। पिता के निधन के समय कीर्ति चौथी कक्षा में थीं। बेटियों की पढ़ाई के लिए मां ने संघर्ष किया और 2008 में उनका चयन शिक्षामित्र के पद पर हो गया। बाद में 2015 में गीता रानी सहायक अध्यापक बन गईं। उन्होंने अपने बेटियों को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया।
कीर्ति सागर ने 10वीं नगर के कमला ईडन गार्डन से उत्तीर्ण की। फिर खरसोल के एसके इंटर कॉलेज से इंटर पास हुईं। बाद में आईएफटीएम से सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक किया। फिर दिल्ली जाकर दो साल कोचिंग की। कीर्ति ने इससे पहले दो बार पीसीएस की परीक्षा दी थी, लेकिन वह प्री परीक्षा में ही सफल हो सकी थीं। तीसरे प्रयास में उनका चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ। उनकी मां गीता रानी बेटी की सफलता पर बेहद खुश हैं। कीर्ति ने कहा कि वह डिप्टी जेलर बनकर जेलों की स्थिति में सुधार के लिए काम करेंगी।
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इंटरव्यू में पूछा, सौतन का समाज में क्या रोल है
पीसीएस परीक्षा पास करने वाली कीर्ति ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनका रोल मॉडल कौन है तो उन्होंने बेबाकी से अपनी मां का नाम बताया। दूसरा सवाल था कि सौतन का समाज में क्या रोल है। इस पर कीर्ति ने बताया कि सौतन किसी महिला के पति की दूसरी पत्नी होती है। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत हिंदू समाज में वैधानिक तौर पर सौतन का कोई रोल नहीं है। पहली पत्नी के होते हुए दूसरी पत्नी का कोई स्थान नहीं है। उनसे अगला सवाल पूछा गया कि रामायण में सबसे बड़ा त्याग किसका था। कीर्ति ने कहा कि रामायण में सबसे बड़ा त्याग भरत का था।