रामपुुर। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने घरों और मंदिरों में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर ज्ञान का वरदान मांगा। माता का रोली से तिलक कर पुष्प व फल अर्पित कर नवरात्र व्रत कथा का पाठ किया। इसके बाद आरती व दुर्गा चालीसा के पाठ के साथ ही पूजन किया। श्रद्धालुओं ने हवन सामग्री के साथ ही धूप,कपूर, लौंग, सूखे मेवा, मिश्री-मिष्ठान, देशी घी के साथ आहुति देकर पूजन किया। इसके साथ ही कई श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया और इसके साथ कवच, कीलक और अर्गला स्तोत्र का पाठ किया।
पंडित विश्वनाथ शर्मा बताते हैं कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। मां ब्रह्मचारिणी का उद्भव ब्रह्मा जी के कमंडल से माना जाता है, इसीलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़। माता का यह रूप सृष्टि की सर्जक के रूप में पूजा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी ध्यान, ज्ञान और वैराग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। साधक उनकी आराधना कर ज्ञान-ध्यान के साथ ही वैराग्य प्राप्त कर सकते हैं। शहर के श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, श्री हरिहर मंदिर, माई का थान, आवास विकास स्थित नव दुर्गा वैष्णो माता आदि मंदिरों पर सुबह के समय ही श्रद्धालु पहुंच गए। भक्तों ने माता के जयकारे लगाए। रात्रि के समय शहर में कई स्थानों पर माता रानी का जगराता हुआ। लोगों ने माता रानी से अपने परिवार में सुख शांति और समृद्धि बनाए रखने की मन्नत मांगी। ऐसा माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन और पूजन से संतान की प्राप्ति का योग बनता है।