रामपुर। निकाय चुनाव में आरक्षण के लिए गठित ओबीसी आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर फिर से ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया जाएगा। ऐसे में कई जिले के कई निकायों के आरक्षण में बदलाव हो सकता है। आरक्षण में बदलाव की स्थिति में निकाय चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी में जुट कई दिग्गजों के अरमानों पर पानी फिर सकता है।
रामपुर जिले में 11 निकाय हैं, जिसमें पांच नगरपालिका और छह नगर पंचायतें शामिल हैं। निकाय चुनाव को लेकर पिछले साल जो आरक्षण जारी किया था उसमें 11 में से 10 निकायों को अनारक्षित की श्रेणी में रखा गया था। इस स्थिति को देखते हुए कई दिग्गजों ने ताल ठोकना शुरू कर दिया था। लेकिन अब इन निकायों के आरक्षण में बदलाव तय है। ऐसे में सबकी नजरें शासन की ओर से जारी होने वाली आरक्षण की सूची पर लगी हुई है। जानकारों का कहना है कि वार्ड के साथ-साथ निकायों के अध्यक्ष के आरक्षण में बदलाव होगा। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि जिले के 11 निकायों में से दो तीन के आरक्षण में बदलाव हो सकता है। ऐसी संभावना है कि मिलक नगरपालिका के अध्यक्ष का पद ओबीसी के लिए आरक्षित किया जा सकता है। क्योंकि मिलक में ओबीसी बहुल क्षेत्र है। यहां से टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। सिर्फ भाजपा से इस सीट पर टिकट के लगभग 15 दावेदार हैं। इसके अलावा स्वार और टांडा की नगरपालिका में से किसी एक को भी ओबीसी के लिए आरक्षित किया जा सकता है। इन दोनों सीटों पर भी भाजपा से टिकट के कई दावेदार हैं। अन्य दलों के संभावित दावेदार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा के जिला महामंत्री हरीश गंगवार का कहना है कि निकायों में आरक्षण की स्थिति क्या होगी। यह तो शासन स्तर से तय होगा। अभी हमारा पूरा जोर नये मतादाता पर बनाने पर है। क्योंकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है।