रामपुर। नवाबों से पहले राजा राम सिंह कठेरिया का रामपुर पर राज हुआ करता था। करीब तीन सौ साल पहले राजा राम सिंह जब रामपुर आए तो वह जंगलों के बीच आकर बस गए थे। राजा राम सिंह ने राजद्वारा मोहल्ला बसाया था। उस वक्त यह इलाका सबसे ऊंचा था। यहां एक टीला भी था, जहां पर दंगल होता था। समय के साथ तमाम बदलाव हुए और आज यह मोहल्ला शहर के बीचोंबीच है। रामपुर को नवाबों का शहर कहा जाता है। 1774 से 1949 तक यहां नवाबों का शासन रहा। नवाबों ने शहर को अपने हिसाब से बसाया, लेकिन शहर के मोहल्ला राजद्वारा का इतिहास नवाबी शासन से भी पुराना है। इतिहासकारों के अनुसार राजद्वारा मोहल्ला करीब तीन सौ साल पहले बसाया गया था।
राजा राम सिंह जब रामपुर आए तो यहां जंगल हुआ करता था। घने जंगल के बीच ही वह इसी स्थान पर निवास करने लगे। यह इलाका तब सबसे ऊंचा था, इसका लोगों को काफी फायदा मिलता था। यहां से दूर तक निगरानी हो सकती थी। यहां एक ऊंचे टीले पर राजा के सैनिकों का दंगल होता था। इस इलाके को राजद्वारा कहा जाता था। 1774 में राजा राम सिंह का शासन खत्म हुआ और नवाबी शासन शुरू हो गया। नवाबों ने भले ही शहर की तस्वीर बदली, लेकिन इस मोहल्ले का नाम नहीं बदला। आज भी यह मोहल्ला राजद्वारा के नाम से ही जाना जाता है।
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नवाबी शासन में बनाया गया था राजद्वारा गेट
नवाबी दौर में राजा राम सिंह द्वारा बसाए गए राजद्वारा इलाके को सुरक्षित करने के लिहाज से राजद्वारा गेट बनाया गया था। यहां एक बड़ा गेट लगवाया गया था, ताकि बाहरी व्यक्ति बिना सैनिकों की इजाजत के प्रवेश न कर सकें। हालांकि, समय के साथ यह गेट जर्जर हो गया और फिर सपा शासन में इस गेट को तोड़ दिया गया था।
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क्या कहते हैं लोग
नवाबों से पहले यहां राजा राम सिंह कठेरिया का राज था। उन्होंने ही राजद्वारा मोहल्ले को बसाया था। अब इस मोहल्ले में घनी बस्ती है और यह मोहल्ला शहर के बीच है। - महेंद्र कुमार
राजद्वारा मोहल्ले के बारे में पूर्वजों से सुना है। इसका इतिहास काफी रोचक है। इसे राजा राम सिंह कठेरिया ने बसाया था। - नितिन अग्रवाल
स्थानीय निवासी
राजद्वारा मोहल्ले का नाम बचपन से सुनते आए हैं। घर के बुजुर्गों से इसके बारे में जानकारी मिली है। इसका इतिहास नवाबों के शासन से भी पुराना है। - अतहर अली, स्थानीय निवासी