रामपुर। आर्य समाज ज्वालानगर के तत्वावधान में गणेश धर्मशाला में आयोजित 24 वां वेद महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को 21 कुंडीय वैदिक महायज्ञ गढ़मुक्तेश्वर से पधारे वैदिक संन्यासी स्वामी अखिलानंद सरस्वती ने संपन्न कराया।
उन्होंने कहा कि माता-पिता का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपनी संतानों को उत्तम शिक्षा और संस्कार देकर योग्य बनाएं। गृहस्थ आश्रम का केंद्र बिंदु संतान का निर्माण ही होना चाहिए। संतान संस्कार वान है तो उसके लिए धन की आवश्यकता नहीं है और यदि संतान संस्कार विहीन है तो अपने माता-पिता द्वारा कमाई हुई सभी संपत्ति को नष्ट कर सकती है। अलीगढ़ से पधारे आचार्य ऊधम सिंह शास्त्री द्वारा अपने भजन उपदेश में बताया गया वेद ज्ञान का भंडार है। हम सबको वेदों का अध्ययन करना चाहिए और वेदों के आधार पर जो पुस्तकें लिखी होती है उनका स्वाध्याय करना चाहिए। बहराइच से आई गीता शास्त्री ने समाज में व्याप्त नारी जाति में व्याप्त ढोंग, आडंबर, रूढ़ियां और कुरीतियों से दूर रहने को कहा। शांति पाठ और जयघोष के बाद कार्यक्रम का अंत हुआ। इस मौके पर इंद्र लाल आर्य, ओमवीर सिंह वैदिक, भारत सिंह आर्य, हरिदत्त कर्मठ, रामकिशोर आर्य, राजवीर आर्य, भजन लाल आर्य मौजूद रहे।