रामपुर। रियासतकाल में नवाब परिवार के कर्मचारी ऐतिहासिक नवाबी किला में बने आवासों में रहा करते थे। 1911 में इसका नाम महल सराय रखा गया था। आजादी के बाद यहां बड़ा मोहल्ला बस गया और आम लोग भी रहने लगे। नवाबी दौर में पड़ा महल सराय नाम अब शहर के चर्चित मोहल्लों में गिना जाता है। नवाबों के शहर रामपुर की ऐतिहासिक धरोहरें आज भी उस दौर की शान-ओ-शौकत को बयां करती हैं। नवाबों ने अपने शौक और उस वक्त की जरूरत के हिसाब से शहर को बसाया। रामपुर शहर बसाने के बाद यहां के मोहल्लों का भी अपना इतिहास रहा है। शहर के अधिकतर मोहल्लों के नाम नवाब परिवार और उनके दौर से ही जुड़े हुए हैं।
शहर के बीचोंबीच किला परिसर में रजा लाइब्रेरी के पास स्थित महल सराय मोहल्ले का भी अपना इतिहास है। इतिहासकार बताते हैं कि रियासतकाल में यहां नवाबों के कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनाए गए थे। इसे ही महल सराय नाम दिया गा था। नवाब हामिद अली खां ने पहले यहां हामिद मंजिल जो कि वर्तमान में रजा लाइब्रेरी का भवन है, बनवाई थी। नवाबों के कर्मचारी इसी मोहल्ले में रहकर नवाबों की सेवा किया करते थे। शहर के बीचोंस्थित इस स्थान का नाम महल सराय पड़ गया। आजादी के बाद यहां आम लोग भी बस गए।
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नवाब हामिद अली खां के शासनकाल में शहर में महल सराय हुआ करती थी। 1902 में किले का निर्माण हुआ और फिर 1911 में महल सराय बसा। तभी से इस मोहल्ले का नाम महल सराय पड़ गया।
- महेंद्र सक्सेना, इतिहासकार