रामपु्र। लगातार बारिश और रामनगर बैराज से कोसी नदी में पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर में लगातार वृद्दि हो रही है। जिले में बाढ़ की संभावना के मद्देनजर जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों की छुट्टी निरस्त कर दी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में आने वाली बाढ़ के दौरान जो भी तैयारियां कराई गई थी उन्हें तत्काल दुरुस्त करा लिया जाए और पूरी तत्परता के साथ नदी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत पहुंचाई जाए।
डीएम सोमवार को कलेक्ट्रट सभागार में अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण प्रभावित होने वाले 31 गांवों में विशेष प्रबंध कराने के निर्देश एसडीएम और बीडीओ को दिए। उन्होंने कहा कि इन गांव के लोगों में पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम के माध्यम से सतर्कता संबंधी जागरूकता फैलाई जाए तथा गांव के विद्यालयों को शेल्टर होम के रूप में तैयार कर लिया जाए ताकि कच्चे मकानों में रहने वाले लोग तथा जलभराव के कारण समस्या का सामना कर रहे लोगों को विद्यालयों में संचालित शेल्टर होम में रखा जा सके। इसके लिए ग्राम प्रधान सभी जरूरी प्रबंधक सुनिश्चित कराएंगे। विद्यालय के अध्यापक भी लगातार सक्रिय रहेंगे तथा लोगों को राहत पहुंचाने में मदद करेंगे।
पूर्व में आई बाढ़ के दौरान प्रानपुर ,खौद और बिलासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में कटान की वजह से समस्याएं उत्पन्न हुई थी इसलिए जिलाधिकारी ने ऐसे संवेदनशील स्थलों को चिह्नित करके वहां पहले से ही जरूरी इंतजाम कराने के लिए अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी एवं संबंधित एसडीएम को निर्देशित किया। जलभराव के दौरान विद्युत की वजह से कोई जनहानि न होने पाए इसलिए उन्होंने सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में लटकते हुए तारों को तत्काल दुरुस्त कराएं। ऐसे क्षेत्र जहां पानी का भराव हो जाए वहां तत्काल विद्युत बाधित कर दें ताकि किसी प्रकार की जनहानि न होने पाए। जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित किया कि बाढ़ और भारी बारिश के दौरान जरूरतमंद लोगों को खाद्य सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए पर्याप्त प्रबंध कराएं ताकि लोगों के सामने खाद्यान्न का संकट न उत्पन्न होने पाए। ग्रामीण क्षेत्रों में लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान और पंचायत सहायक सहित अन्य ग्राम स्तर के कार्मिकों की लगातार सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सभी कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर लोगों को जागरूक करें कि वह क्षतिग्रस्त और कच्चे मकानों में न रुके तथा नजदीकी शेल्टर होम में जाकर रुके।