रामपुर। साइलेंट किलर के तौर पर पहचाने जाने वाली बीमारी हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) को नजरंदाज करने से जान जोखिम में पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाइपरटेंशन का इलाज समय रहते होना बेहद जरूरी है। अनदेखी करने पर हृदय, किडनी, मस्तिष्क आदि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।जिला अस्पताल में स्थित मन कक्ष की संचालक अजमी नाज ने बताया कि हाइपरटेंशन से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी की बड़ी वजह असंतुलित जीवनशैली से मानसिक तनाव है। चिंता की बात यह है कि दुनिया भर में हृदय रोग और असमय मौत की प्रमुख वजहों में से हाइपरटेंशन की क्रोनिक स्थिति होती है। इससे रक्त धमनियों में खून का दबाव बढ़ जाता है।
लंबे समय तक खून का दबाव बने रहने से शरीर के सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। बताया कि शुरुआत में इसका स्पष्ट लक्षण नजर न आने से इसकी पहचान कठिन होती है। लिहाजा, मरीज में होने वाले शारीरिक दुष्प्रभाव को नजरंदाज करते रहते हैं। समस्या बढ़ने पर लक्षण के आधार पर चिकित्सक जांच कराते हैं, तब बीमारी का पता चलता है। प्रमुख लक्षण में सिर दर्द, चक्कर आना, सुस्ती, नींद न आना, थकान, सीने में दर्द, तेज सांस चलना आदि हैं। जिला अस्पताल में इस समय प्रतिदिन मानसिक तनाव के 15-20 मरीज आते हैं। जिनका मन कक्ष में इलाज कराया जाता है।
हाइपरटेंशन के कारण -
चिकित्सक बताते हैं कि हाइपरटेंशन का मुख्य कारण तनाव और अनियंत्रित खानपान होता है। इसके अलावा मोटापा, नींद की कमी, तैलीय पदार्थों और नमक का अधिक सेवन भी इसके कुछ अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि अपनी डाइट पर ध्यान दें।
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हाइपरटेंशन के लक्षण
सिर दर्द, सिर चकराना, थकान और सुस्ती लगना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, सीने में दर्द, सांसें तेज चलना या सांस लेने में तकलीफ होना, आंखों से धुंधला दिखना।
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नियमित जीवन शैली और संयमित खानपान को बनाए रखना चाहिए। जिससे लोगों को हाइपरटेंशन उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं होगी।
-डॉ. दशरथ सिंह, एसीएमओ, जिला अस्पताल, रामपुर