आजम खां व उनके बेटे अब्दुल्ला
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यूपी की सियासत में आजम खां परिवार का अच्छा रसूख रहा है। खुद आजम खां 10 बार विधानसभा के चुनाव जीत चुके हैं। वो एक बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं तो एक बार लोकसभा का चुनाव भी जीते हैं। उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा एक बार राज्यसभा की सदस्य रहीं हैं तो एक बार विधानसभा का उपचुनाव जीता है। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम 2017 और 2022 में स्वार सीट से विधानसभा का चुनाव जीते। हालांकि दोनों बार उनकी विधायकी चली गई। अब्दुल्ला की विधायकी जाने के बाद यह पिछले 22 सालों में पहला मौका है जब विधानसभा में आजम परिवार का कोई सदस्य नहीं है।
वैसे आजम खां राजनीतिक सफर लगभग 45 साल का है। आजम खां रामपुर विधानसभा सीट से 12 बार चुनाव लड़े हैं जिसमें उनको 10 बार जीत हासिल हुई है। आजम खां ने विधानसभा का पहला चुनाव 1977 में लड़ा था, जिसमें हार का सामना करना पड़ा। 1980 के विधानसभा चुनाव से आजम खां की जीत का सफर शुरू हुआ जो 1996 तक जारी रहा। 1996 तक वो लगातार पांच बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। 1996 में वो विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के अफरोज अली खां से हार गए।
इसके बाद सपा की ओर से उनको राज्यसभा में भेज दिया गया था। इसके बाद आजम खां 2002 से 2022 तक फिर से लगातार पांच बार विधानसभा का चुनाव जीते। 2019 में आजम खां ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। सांसद बनने के बाद आजम खां ने विधानसभा की सीट छोड़ दी थी।
इसके बाद रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने जीत हासिल की। इसके अलावा आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम 2017 और 2022 में स्वार विधानसभा सीट से निर्वाचित जरूर हुए, लेकिन दोनों बार उनकी विधायकी चली गई। इस तरह यूपी की सियासत में 22 सालों में यह पहला मौका है जब विधानसभा में आजम खां के परिवार का कोई सदस्य नहीं बचा है।