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Rampur News: प्रदूषण पर वार को तैयार किसान, गत्ता और एथाॅनाल के लिए भेज रहे पराली

Fri, 25 Oct 2024 12:48 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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बिलासपुर (रामपुर)। पर्यावरण प्रदूषण पर वार के लिए पराली का उपयोग अब गत्ता और एथाॅनाल तैयार करने के लिए होने लगा है। जिले के बिलासपुर क्षेत्र के जमीदार किसान यूपी व उत्तराखंड में पराली को बेलर मशीन से निकालकर प्लांट में भेज रहे हैं, जहां पर इसका निस्तारण हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इससे पराली जलाने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा। हालांकि अभी तक किसानों से पराली को खरीदा नहीं जा रहा है, बल्कि 500 रुपये एकड़ के हिसाब से किसानों से पराली उठाने का खर्चा लिया जा रहा है लेकिन अगले साल किसानों से पराली को खरीदा जा सकेगा।
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पराली पर्यावरण प्रदूषण के लिए खतरा बनी है। दिवाली से पहले हर साल पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे दिक्कत होती है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त है, कि पराली जलाने पर सख्त जुर्माना लगाया जाए। जिले भर में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार सख्ती भी की जा रही है। इस बीच किसानों ने पराली प्रबंधन पर अच्छा कार्य करना शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा फसल बिलासपुर क्षेत्र में होती है इसलिए यहां पर पराली प्रबंधन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। शासन और प्रशासन के लिए सिर दर्द बनी किसानों के खेतों में जलने वाली धान की पराली का निस्तारण पंजाब, बाजपुर और क्षेत्र के करीब 50 बेलरों द्वारा किया जा रहा है। यह बेलर करीब 36000 हैक्टेयर धान की फसल में करीब 60 प्रतिशत कटाई होने के बाद करीब 19 हजार हेक्टेयर की पराली करीब 112.5 मीट्रिक टन को उठाकर उत्तराखंड व बदायूं के प्लांट को भेज चुके हैं। यह बेलर पराली के रोल बनाकर सीमांत प्रदेश उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर के कस्बा बाजपुर व बदायूं स्थित संयंत्र को भेज रहे हैं। जिससे किसानों को काफी राहत मिल रही है। अफसरों के अनुसार तहसील क्षेत्र के 219 गांवों में इस बार करीब 36000 हेक्टेयर भूमि में धान की फसल उगाई गई है। जिसमें करीब 60 फीसदी धान की कटाई किसान कंबाइन आदि से कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि किसान खेत में पराली न जलाएं इसके लिए इस बार शासन और जिला प्रशासन बेहद गंभीर हुआ। उन्होंने तहसील स्तर पर सचल दस्ता, विकास खंड स्तरीय समिति, ग्राम पंचायत स्तरों पर निगरानी समितियां का गठन किया। तहसील, विकास, कृषि आदि विभागों के कर्मचारियों को भी पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए लगाया गया है। उन्होंने बताया कि धान की कटाई के बाद पराली के निस्तारण के लिए उन्होंने पंजाब, बाजपुर, बदायूं से आए व स्थानीय किसानों के करीब 50 बेलर क्षेत्र में सेक्टर बार पराली उठाने को लगाए हैं।

बेलर खेत में किसान द्वारा काटे गए धान की पराली को ऑटोमेटिक बैलरों से बंडल बना रहे हैं। जो आसानी से उठाए जा सकते हैं। एसडीएम बिलासपुर हिमांशु उपाध्याय का कहना है कि कृषि विभाग ने क्षेत्र के ग्राम कुइया व कुआंखेड़ा गांव में दो डंपिंग ग्राउंड बनाए हैं, जहां इन पराली के बंडलों को एकत्र किया जा रहा है। यहां से पराली के बंडल बाजपुर, बदायूं के प्लांटों को भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया अब तक इन बेलेरों के माध्यम से करीब 112.5 मीट्रिक टन पराली किसानों के खेतों से उठाकर सयंत्रों भेजी जा चुकी है। उनका दावा है कि शीघ्र ही धान की कटाई पूरी होगी और सभी शत प्रतिशत पराली संबंधित प्लांटों को भेज दी जाएगी।
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एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि पिछले वर्ष 2023 24 में क्षेत्र में धान की पराली जलाने की 85 घटनाएं हुईं थीं। जिसमें किसानों पर सवा लाख रुपए से अधिक का जुर्माना डाला गया था। इस बार मात्र तीन जगह पराली जलाने की सूचनाएं आईं थीं, मगर जांच में तीनों सूचनाएं गलत निकली। मालूम हुआ कि किसानों ने महज कूड़ा जलाया था।

एसडीएम ने बताया कि पराली जलने की संभावित घटनाओं से जुड़े तमाम गांवों के करीब 2000 किसानों को अग्रिम नोटिस दे दिए थे। इन सभी किसानों को चेतावनी दे दी थी कि अगर पराली जलने की घटनाएं हुई तो उनसे जुर्माना धनराशि वसूली जाएगी।

बेलर संचालक पिपलिया अहला निवासी बूटा सिंह ने बताया कि क्षेत्र में करीब 50 बेलर धान की पराली उठाने का कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक बेलर सिस्टम की कीमत करीब 21 लाख रुपए है। जिसमें सरकार करीब सात लाख रुपए का अनुदान देती है। उनका आरोप है कि लेकिन इस बार बेलर सिस्टम खरीदने वालों को अनुदान नहीं दिया गया है। इस सिस्टम में ट्रैक्टर, ट्राली, कटर आदि सामान होता है।

बेलर संचालक बूटा सिंह ने बताया कि एक एकड़ खेत में करीब 18 क्विंटल पराली निकलती है। जिसमें एक रोल करीब 30 क्विंटल का बनता है। बेलर संचालक को एक क्विंटल पर सभी खर्चा निकालने के बाद करीब 50 से 60 रुपए की बचत होती है। बदायूं, पंजाब, उत्तराखंड के बाजपुर में पराली निस्तारण के प्लांट लगे हुए हैं। जहां परली के माध्यम से थिनोल, कागज आदि बनाने का कार्य किया जाता है। वहीं पराली को बॉयलर में भी प्रयोग किया जाता है।
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