स्वार। क्षेत्र के इमरताराय ग्राम पंचायत के प्रधान पिछड़ी जाति झोझा का प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में फंस गए हैं। कूट रचित दस्तावेज बनाने के आरोप में प्रधान और उनके दो बेटों के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज करली गई है। पुलिस ने विवेचना शुरु करदी है।
2021 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत इमरताराय का प्रधान पद पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित था। गांव निवासी मोहम्मद अहमद ने झोझा जाति का प्रमाण पत्र लगाकर नामांकन दाखिल किया था। वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी फारूक पुत्र अब्दुल नबी को हराकर चुनाव जीत गए। इसके बाद फारूक ने मोहम्मद अहमद की जाति को चुनौती देते हुए शिकायत की कि मोहम्मद अहमद वास्तव में तुर्क जाति से हैं जो सामान्य वर्ग में आती है। उसका यह भी कहना था कि रामपुर जनपद में एक भी झोझा परिवार नहीं रहता है तब फिर मोहम्मद अहमद द्वारा कराया गया प्रमाण पत्र पूरी तरह से कूट रचित है और धोखाधड़ी का कृत्य है।
प्रतिवादी ने ग्राम प्रधान मोहम्मद अहमद के भूमि संबंधी दस्तावेज निकलवाए तब उसमें उनकी तथा उनके बेटों आसिफ और आरिफ की जाति तुर्क दर्ज होना पाई गई। समस्त अभिलेखों के साथ फारूक ने अधिकारियों को शिकायत की लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया जिसके चलते न्यायालय की शरण ली। सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने ग्राम प्रधान मोहम्मद अहमद और उनके दो बेटों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश कर दिया। कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की 420, 467,468 और 471 के तहत रिपोर्ट दर्ज करली है। कोतवाल शरद मलिक ने बताया कि रिपोर्द कर विवेचना शुरु की जा रही है।