रामपुर। रोड जाम करने के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री समेत चार आरोपियों को चार अगस्त को एक-एक माह कारावास और पांच-पांच सौ रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व राज्यमंत्री समेत चार लोगों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। जिस पर शनिवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी बहस की। दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई है। इस मामले में कोर्ट 09 सितंबर को फैसला सुना सकती है।
मामला 21 अगस्त 2007 का है। उस वक्त विधानसभा चुनाव के दौरान धारा 144 लगी हुई थी। आरोप है कि जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, पूर्व राज्यमंत्री शिवबहादुर सक्सेना, दीपक नागर और राजकुमार ने धारा 144 का उल्लंघन करते हुए रोड जाम कर दिया और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी स्वार धनपाल सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले में विवेचना करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी।
इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने चार अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, पूर्व राज्यमंत्री शिव बहादुर सक्सेना, दीपक नागर और राजकुमार को एक-एक माह के कारावास और पांच-पांच सौ रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी। चारों आरोपियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। शनिवार को अपील पर बहस हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला विधि सम्मत नहीं है और कोर्ट ने साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए निर्णय पारित किया है, जिसको निरस्त किया जाना जरूरी है। जबकि एडीजीसी ने तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला सही है उसको बरकरार रखा जाए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले में 09 सितंबर की तारीख तय की है। संभावना है कि कोर्ट इस तिथि पर अपना फैसला सुना सकती है।