टांडा (रामपुर)। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण आंदोलन में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़कर भागीदारी की थी। आंदोलन के दौरान तमाम कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उस वक्त पुलिस लगातार छापेमारी कर लोगों का उत्पीड़न कर रही थी। अब दशकों के इंतजार के बाद राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हो रहा है।
22 जनवरी को अयोध्या धाम में बने प्रभु श्रीराम के मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम का आयोजन हो रहा
है, जिसको लेकर टांडा तहसील में भी माहौल राममय होने लगा है। विभिन्न संगठनों से जुड़े रामभक्त तहसील भर में घूम घूम कर अक्षत वितरण कर चुके हैं। राम मंदिर को बनवाने के लिए 1992 में आंदोलन करने वाले कार सेवक उन दिनों को याद कर बताते हैं कि जब राम मंदिर का आंदोलन शुरू हुआ तो टांडा में पुलिस ने राम भक्तों पर नजर रखनी शुरू कर दी। नगर निवासी संजय गुप्ता के नेतृत्व में पप्पन सक्सैना, भूदेव सैनी, राजकुमार सक्सेना, राम किशोर सैनी, रमेश अनेजा, डाल चंद्र सैनी, हरी प्रसाद वर्मा, रमेश अनेजा, ऋषि गुप्ता समेत दो दर्जन से अधिक राम भक्त आंदोलन में हिस्सा लेने अयोध्या जा रहे थे, लेकिन पुलिस द्वारा सभी को गिरफ्तार कर 10 दिन के लिए रामपुर जेल भेज दिया गया। वो रामभक्तों के लिए बहुत मुश्किल वक्त था, लेकिन अब जब अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम मंदिर बन गया है और प्राण प्रतिष्ठा हो रही है तो वो सारी परेशानी का फल मिल रहा है ऐसा प्रतीत होता है।
अयोध्या जाने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा जेल भेज दिया गया था। वो दस दिन जेल में मुश्किल भरा समय था। अब पूरा देश श्रीराम मंदिर निर्माण पर दिवाली मानने वाला है। -पप्पन सक्सेना, कार सेवक
श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण और उसमें प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा होना किसी सपने के पूरा होने जैसा है। लंबे संघर्ष के बाद देश अब इस पल को याद रखेगा। राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में जेल जाना भी अब अखर नहीं रहा है। पूरे देश को इस ऐतिहासिक महोत्सव में शामिल होकर जश्न मनाना चाहिए। - भूदेव सैनी, कार सेवक