रामपुर। सपा नेता आजम खां पर दर्ज डूंगरपुर बस्ती में घर में घुसकर मारपीट व डकैती और आपराधिक षड्यंत्र रचने के एक और मामले में बृहस्पतिवार को कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के फैसले के लिए बृहस्पतिवार का दिन तय किया है।
गंज थाना क्षेत्र के डूंगरपुर बस्ती को खाली कराने को लेकर 12 मुकदमे 2019 में दर्ज हुए थे। यह सभी मामले बस्ती में रहने वाले लोगों की ओर से दर्ज कराए गए थे, इसमें एक मामला पांच जुलाई 2019 को घेर मियां खां निवासी शफीक बानो ने गंज थाने में दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि तीन फरवरी 2016 को रात लगभग आठ बजे पूर्व चेयरमैन अजहर खां, तत्कालीन सीओ सिटी आले हसन, रानू खां, ओमेंद्र सिंह चौहान, फिरोज खां, जिबरान खां, ठेकेदार बरकत अली और 20-25 अज्ञात पुलिस कर्मी बस्ती में आए और उनके मकान में जबरन घुस गए और धमकाते हुए परिवार को घर से निकाल दिया। साथ ही नौ हजार रुपये की नगदी लूट ली।
आरोप है कि मकान पर बुलडोजर भी चलवाया। इस मामले में सपा नेता आजम खां को भी आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया है। कोर्ट में 11 मार्च को दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। कोर्ट बृहस्पतिवार को इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है।
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डूंगरपुर के एक मामले में सजा तो दूसरे में बरी भी हो चुके हैं आजम
डूंगरपुर प्रकरण में आजम खां पर 12 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से एक मामले में 31 जनवरी को आजम खां बरी हो चुके हैं। वहीं दूसरे मामले में आजम खां को सात साल की कैद व आठ लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई जा चुकी है। यह सजा कोर्ट ने 18 मार्च को सुनाई थी। अब कोर्ट तीसरे मामले में बृहस्पतिवार को फैसला सुना सकती है। डूंगरपुर प्रकरण के अन्य नौ मामले भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में आजम को सात साल की सजा हुई। तभी से वो सीतापुर जेल में बंद हैं। इसी मामले में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल में और पत्नी डाॅ. तजीन फातमा रामपुर जेल में हैं।