रामपुर। मेंथा की शिवालिक प्रजाति को विकसित करने वाले पद्मश्री सुशील सहाय को नम आंखों के बीच राजकीय सम्मान के साथ बृजघाट पर अंतिम विदाई दी गई। उनकी बड़ी बेटी सुचेता ने उनको मुखाग्नि दी तो लोगों की आंखें छलक उठीं। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को बिलारी से रामपुर लाया गया, जहां मेंथा कारोबारियों और अन्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।मूल रूप से मुरादाबाद के बिलारी निवासी सुशील सहाय (80) का रामपुर से गहरा नाता रहा है। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 2005 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनका मुरादाबाद बिलारी स्थित फार्म हाउस पर निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना के बाद यहां के मेंथा कारोबारियों के साथ ही उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
सहाय के शव को बुधवार को रामपुर स्थित मक्का मिल काॅलोनी लाया गया, जहां उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। यहां पर मेंथा जगत के साथ ही अन्य उद्योगों से जुड़े तमाम कारोबारियों ने पहुंचकर श्रद्धाजंलि दी। कुछ देर बाद उनके शव को यहां से बृजघाट ले जाया गया, जहां उनकी बड़ी बेटी सुचेता ने उनको मुखाग्नि दी। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
सराफा कारोबारी पारितोष चांदीवाला ने बताया कि सहाय की दो बेटियां हैं। छोटी बेटी का विवाह मुरादाबाद, जबकि दूसरी बड़ी बेटी का मुजफ्फरनगर में हुआ है। उनकी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि दी। उन्होंने सहाय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से मेंथा कारोबार जगत को बड़ा नुकसान हुआ है।
इस मौके पर मेंथा व्यवसायी प्रदीप गुप्ता, स्वाति मेंथाल के स्वामी एसके गुप्ता, कपिल आर्य, बच्चन सिंह बिलासपुर, धीरेंद्र कुमार अग्रवाल, सरित सिंघल, सुमन जौहरी, एसपी रस्तोगी, देवेंद्र कुमार गुप्ता, आशु गुप्ता, आईआईए के सचिव श्रीष गुप्ता, पुष्पेंद्र अग्रवाल सुशील सहाय की पत्नी आशा सहाय, बेटी सुचेता व सुनैना के साथ ही उनके दामाद भी मौजूद रहे।