रामपुर। गैंगरेप के मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दो लोगों को बरी कर दिया। कोर्ट ने झूठी गवाही देने पर महिला के खिलाफ वाद दायर करने के निर्देश दिए हैं। घटना दो साल पहले अजीमनगर थाना क्षेत्र की है।
अजीमनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने 14 दिसंबर 2016 को एक मुकदमा दायर किया था। जिस पर पुलिस ने महिला की तहरीर पर गांव के ही रामौतार और वीर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद इस मुकदमे का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता समेत कुल पांच गवाह पेश किए। अधिकांश गवाहों की गवाही एक-दूसरे से मेल नहीं खाई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता रमेश लोधी ने बताया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं करा सका। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने रामौतार और वीर सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। साथ ही इस मामले में झूठे बयान देने पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।