सीआरपीएफ आतंकी हमले के मामले में सोमवार को मुंबई के एआरटीओ ने कोर्ट में पेश होकर फईम अरशद अंसारी के ड्राइविंग लाइसेंस को फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि जांच में ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी पाया गया था। इसकी जांच उन्होंने खुद की थी।
31 दिसंबर 2007 की रात में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें आठ सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की मौत हो गई थी। घटना के 40 दिन बाद पुलिस और एटीएस की टीम ने आठ आतंकियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई इन दिनों सेशन कोर्ट में चल रही है।
सोमवार को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी आतंकियों मोहम्मद फारुख, इमरान शहजाद, सबा उद्दीन उर्फ सबा, मोहम्मद शरीफ, जंगबहादुर, गुलाब खां, कौसर खां और फईम अर्शद अंसारी को कोर्ट में पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मुंबई के एआरटीओ संजय प्रभाकर नेत्रवाल कोर्ट में पेश किया गया। नेत्रवाल ने गवाही दी।
कहा कि फईम के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच उन्होंने खुद की थी। जांच में पता गलत पाया गया था। उसने गलत जानकारी दी थी, जोकि उनके अभिलेखों में भी दर्ज है। बचाव पक्ष की ओर से जिरह भी की गई। अब इस मामले की सुनवाई 18 फरवरी को होगी। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया।