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फर्जीवाड़े के दोषी को चार साल का कठोर कारावास

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अमर उजाला ब्यूरो
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रामपुर बुशहर।
अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रामपुर ने संजय कुमार पुत्र लक्ष्मी नंद गांव क्यूंथलू तहसील कुमारसैन, जिला शिमला को भारतीय दंड संहिता की धारा 219 के तहत दोषी पाया है। उसे चार साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
सहायक न्यायवादी सुचित्रा ने बताया कि एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रामपुर पंकज कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए यह सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि कोर्ट की तरफ से नारकंडा में किसी व्यक्ति को समन भेजे गए थे। जिस चौकीदार के हाथ यह समन भेजे गए थे, उसी ने समन प्राप्त कर खुद ही फर्जी हस्ताक्षर भी किए। यह मामला पकड़े जाने पर सब डिवीजनल ज्यूडिशियल मेजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर राजेश तोमर ने संजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। इसके बाद इस मामले की सुनवाई की गई और एडिशनल सीजेएम ने वीरवार को फैसला सुनाया। भारतीय दंड संहिता की धारा 219 के तहत दोषी को चार साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। जुर्माना अदा न करने पर एक माह का साधारण कारावास होगा। इसके अलावा भादंसं की धारा 419 के तहत एक माह का साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना अदा न करने पर सात दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।
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इसके अतिरिक्त दोषी को भारतीय दंड संहित की धारा 420 के तहत तीन साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना किया गया है। जुर्माना अदा न किया तो एक माह का साधारण कारावास होगा। भादंसं की धारा 468 के तहत दोषी को चार साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना अदा न करने पर 30 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। भादंसं की धारा 471 के तहत एक साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना देना होगा। जुर्माना अदा न करने पर एक सप्ताह का साधारण कारावास भुगतना होगा। इस मामले में सरकार की ओर से सहायक न्यायवादी सुचित्रा ने पैरवी की।
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