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Rampur News: ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार, लाइसेंस का इंतजार

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रामपुर। जिला अस्पताल के ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को अब तक संचालन की मंजूरी नहीं मिल सकी है। अस्पताल प्रशासन को मशीनें मिलने के बाद दिल्ली की टीम मुआयना भी कर चुकी है, लेकिन अभी इसको संचालित करने के लिए लाइसेंस नहीं मिल सका है। इसके चलते प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ने पर मरीजों को निजी ब्लड बैंक से खरीदना पड़ता है या दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा नहीं थी। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त 2021 में शासन को ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। जिसकी मंजूरी मिलने पर शासन ने इसके निर्माण के लिए 5.5 लाख रुपये दिए थे। फरवरी 2022 में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया। इसके दो माह बाद एक मशीन जिला अस्पताल में आई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मशीनें मिल गईं।
मशीनें लगने के बाद दोबारा टीम आई और निरीक्षण किया था। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग लाइसेंस प्रक्रिया के लिए इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिल सका है। इसके चलते जिला अस्पताल में आने वाले डेंगू, मलेरिया के पीड़ितों को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ने पर बाहर से लाना पड़ता है।
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कौन-कौन सी हैं मशीनें

ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शमीम ने बताया कि यूनिट में -40 व -80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर प्लाज्मा रखने के लिए एक रेफ्रिजरेटर है। इसके अलावा ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर है। ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर जिसमें 2 से 6 डिग्री सेल्सियस पर ब्लड रखा जाता है। एक एलाइजा रीडर वॉस्टर एवं रेफ्रिजरेटर सेंटीफ्यूज आदि मशीनें हैं।

ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का काम
ब्लड में रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा और प्लेट्लेटस आदि कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड के कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। जरूरत के हिसाब से मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेट्लेटस आदि चढ़ाया जाता है। निकाले गए ब्लड के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग अवधि होती है। एक यूनिट ब्लड से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी हो जाता है।



ब्लड सेपरेशन यूनिट का सारा काम हो चुका है। दिल्ली की टीम आई थी। जो आपत्तियां थीं, उन्हें ठीक कर लिया गया है। लाइसेंस के प्रस्ताव भेजा जा चुका है। लाइसेंस मिलते ही यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा। -डाॅ. एचके मित्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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