सपा नेता आजम खां को रामपुर की कोर्ट ने नफरती भाषण देने के मामले में 27 अक्तूबर 2022 को तीन साल की सजा हुई थी। इसके बाद 28 अक्तूबर को उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। वो रामपुर शहर सीट से विधायक थे। आजम खां पर 90 से अधिक मुकदमे हैं जो कोर्ट में विचाराधीन हैं। आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम को मुरादाबाद की कोर्ट ने 13 फरवरी को 15 साल पुराने मामले में सपा महासचिव आजम खान और उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम को दो साल की सजा सुनाई थी। 29 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस ने पूर्व मंत्री आजम खान की कार को चेकिंग के लिए रोका था जिससे उनके समर्थक भड़क गए थे. इसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया था।
इस हंगामे में अब्दुल्ला समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था. पुलिस ने इस मामले में हंगामा करने वाले सभी लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था। इस मामले में कोर्ट ने आजम खां के साथ अब्दुल्ला आजम को भी दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से 15 फरवरी को अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द किए जाने संबंधी आदेश जारी किया गया था। अब्दुल्ला 2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर जिले की स्वार सीट से निर्वाचित हुए थे।
तीन साल में दो बार जा चुकी है अब्दुल्ला की विधायकी
अब्दुल्ला आजम शायद एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिसकी विधायकी तीन साल के अंदर दो बार निरस्त हुई हो। अब्दुल्ला आजम 2017 के विधानसभा चुनाव में स्वार सीट से निर्वाचित हुए थे। उनके निर्वाचन को उनके मुकाबले चुनाव लड़ने वाले बसपा के प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनावी याचिका दायर कर चुनौती दी थी। आरोप था कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते वक्त अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया था। इसके बाद अब्दुल्ला ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखा था।