रामपुर। जिले में इस समय टीबी के 5713 सक्रिय मरीज हैं। उनका इलाज जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में चल रहा है। इसके तहत टीम मरीजों को दवा उपलब्ध करा रही है। नए निर्देश के अनुसार अब मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी दवा खानी होगी, ताकि मरीज के साथ परिवार के लाेगों में इसके लक्षण न पनप सकें। तीन माह तक उनके परिजनों का भी उपचार कराया जाएगा। सुपरवाइजर, हेल्थ कम्युनिटी अधिकारी को सक्रिय रोगियों को दवा वितरित के लिए कहा है।जिला क्षय नियंत्रण केंद्र की देखरेख में वर्तमान में 5713 मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना टीबी मरीजों को खोजने का काम किया जा रहा है। पोलियो की तरह टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए योजनाएं चल रही हैं। मरीजों के साथ तीमारदारों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। आमतौर पर टीबी का तीन माह का इलाज होता है। इसमें नार्मल टीबी, एमडीआर और एक्सडीआर तीन स्टेज होती हैं।
टीबी मरीजों की देखरेख और दवा आदि देने के लिए परिवार का व्यक्ति ही उसके समीप रहता है। जिससे यह खतरा परिवार के सदस्यों को भी बन जाता है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने मरीज के साथ परिवार को सुरिक्षत करने का फैसला लिया है। टीबी मरीज को तीन माह के कोर्स के साथ परिवार के लोगों को भी दवा दी जाएगी टीपीटी यानी ट्यूबरक्लोसिस प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट के तहत यह अभियान चलेगा। बुधवार को जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. सत्यप्रकाश ने चमरौआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर कर्मचारियों को इसके लिए निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक जगहों पर गंभीरता से इस योजना को चलाने के निर्देश टीम को दिए है।