ग्रामीण क्षेत्रों में खाली हुए एटीएम, नकदी के लिए लोग परेशान
स्वार/टांडा (रामपुर) ।
ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी संकट गहराता जा रहा है। बैंकों में बड़े नोटों की आवक कम होने की वजह से एटीएम खाली हो गए हैं। कई-कई एटीएम तलाशने के बाद भी लोगों को नकदी नहीं मिल पा रही है, जिससे लोग परेशान हैं। पिछले कुछ दिनों से भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से नकदी की आवक कम कर दी है। खासकर, बड़े नोट रोक दिए गए हैं। इसका सीधा असर नजर आने लगा है। रामपुर शहर में भले ही नकदी की समस्या नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बाजार में लगातार नकदी की किल्लत बनी हुई है। इसकी वजह फैल रही अफवाह भी हो सकती हैं। दरअसल, अफवाह है कि एनपीए की मार से उभरने के लिए बैंक ग्राहकों के खातों में जमा रकम का प्रयोग कर सकते हैं, जिसके चलते लोगों में पैसा निकालने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। इसी का नतीजा है कि टांडा के ही 60 फीसदी एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है। लगातार निकासी और आरबीआई से बड़े नोटों की आवक कम होने की वजह से लोगों को नकदी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि क्षेत्र के अधिकांश एटीएम बंद पड़े हैं। सामान्य खर्च के लिए भी लोगों को राशि नहीं मिल पा रही है। रुपये की निकासी के लिए बैंक की शाखाओं से लेकर एटीएम तक लोगों की लंबी कतार लग रही हैं। नगर निवासी फैजान सिकंदर का कहना है कि बैंक में तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन एटीएम में कैश न होने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। मोहम्मद जकी का कहना है कि बैंक द्वारा सुबह से ही एटीएम बंद है का बोर्ड लगा होता है, जिससे वो अपना ही पैसा खाते से नहीं निकाल पा रहे हैं। ग्राम चक गजरौला निवासी मुकेश ने बताया कि बैंक द्वारा लगातार कैश न होने की बात कह कर टाल दिया जाता है। वहीं, बैंक अधिकारियों का कहना है कि एटीएम में रोज सुबह को पैसे डाले जा रहे है लेकिन दोपहर तक वो खाली हो जाते हैं। कैश की कमी के चलते ज्यादा रकम नहीं भरी जा रही है। स्वार के एटीएम का भी यही हाल है। ज्यादातर एटीएम ठप पड़े हैं। ग्राहक खाते से नकदी नहीं निकाल पा रहे हैं। बुधवार को नगर की स्टेट बैंक ब्रांच में लगा एटीएम, पीएनबी, एक्सिस बैंक, जिला सहकारी बैंक की एटीएम मशीनें नकदी से खाली रहीं जबकि, एक्सिस बैंक की एटीएम मशीन चार दिन से खराब पड़ी हैं। सिर्फ बैंक आफ बड़ौदा का एटीएम चालू है, जहां सुबह से ही कतार लग जाती हैं। इसके अलावा अन्य ग्रामीण क्षेत्रों का भी यही हाल है।