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बाढ़ राहत कार्यों में प्रशासन ने झोंकी ताकत, एसडीआरएफ के 45 और पीएसी के 25 कर्मी भी डटे

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रामपुर। टांडा क्षेत्र के लालपुर स्थित कोसी नदी के तेज बहाव में लकड़ी उठाने गए युवक को बचाकर लाती ? - फोटो : TANDA
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रामपुर। करीब 11 साल बाद रामपुर में बाढ़ आई तो राहत एवं बचाव कार्यों में प्रशासनिक अफसरों को पूरी ताकत झोंकनी पड़ गई। गांव से लेकर शहर तक कोसी नदी का पानी आबादी में घुसा तो एसडीआरएफ और पीएसी को लोगों को रेस्क्यू करने की कमान सौंपी गई। बुधवार को जिले में चार नाव के साथ ही 45 एसडीआरएफ कर्मी और 25 पीएसी कर्मियों ने रेस्क्यू की कमान संभाली तो जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से लेकर एडीएम, सभी एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य राजस्व व पुलिस कर्मी-अधिकारी दिन भर दौड़ते रहे। जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान देने के लिए 25 शरणस्थल बनाए गए हैं।मंगलवार रात को आई बाढ़ से रामपुर के हालात बदत्तर हो गए। अचानक बढ़ते जलस्तर ने प्रशासनिक अफसरों को भी संभलने का मौका नहीं दिया। घाटमपुर समेत तमाम गांवों में अफरा तफरी का माहौल हो गया। लोग आपाधापी में सुुरक्षित स्थान की ओर से जाने लगे। मवेशियों को भी निकालने लगे। इस बीच प्रशासनिक अफसर एवं कर्मचारी भी सक्रिय हो गए। शुरुआत में राहत एवं बचाव में अफसरों के पसीने छूट गए, लेकिन रात में ही एसडीआरएफ की तीन टीमें और पीएसी गोताखोरों की एक टीम और सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। ट्रैक्टर और नाव की मदद से लोगों को निकाला गया। दिनभर राहत एवं बचाव का यह काम चलता रहा। शाम को कोसी नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आ सकी। शाम को अफसरों ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में पीड़ितों को राशन एवं भोजन का वितरण किया। साथ ही जिले में बने 25 राहत शिविर में रह रहे लोगों को भोजन आदि उपलब्ध कराया।
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