रामपुर। हजरत जैनुल आबिदीन की याद में कदीमी अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में किले के पूर्वी दरवाजे पर अजादारों ने छुरियों का मातम कर हजरत की शहादत को याद किया। जुलूस में शामिल अलग-अलग स्थानों से आईं तंजीमों ने नोहख्वानी और मरसियाख्वानी पढ़ा। मजलिस में इमामे जुमा मकबरा मौलाना रेहान साहब ने कहा कि इमाम जैनुल आबदीन का नाम अली बिन हुसैन इब्ने अली इब्ने अबू तालिब हैं, लेकिन आप जैनुल आबदीन के नाम से मशहूर हैं। जुलूस में अंजुमन हैदरिया सुल्तानपुर, मुहाफिज अजा इलाहाबाद, अजादार हुसैनी बनारस, जीनत अजा बाराबंकी, जाफरिया बनारस, दुआए जहरा मुजफ्फरनगर, शुहादाये हुसैनी मैमन सादात, अब्बासिया देहलवी, गुलदस्ता हैदरी बरेली, हुसैनिया सैथल, मीसम अजा सिरसी, गुलदस्ता हैदरी सिरसी आदि ने नोहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए रात गए इमामबाड़ा डा. अमजद अली खां चाह मोटे कल्लन पहुंचकर खत्म हुआ। निजामत तनवीर सहरी ने की। जुलूस में मुज्तबा अली बैग, मुज्तबा आब्दी, जुनैद उल्लाह खां, शाहवेज उल्ला खां, इरफान जैदी, मुर्तजा जैदी आदि ने सहयोग किया।