रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की सरकार की मंशा अधूरी रह गई है। जिले में 291 हेल्थ वेलनेस सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन अब तक 181 का संचालन ही हो सका। 68 भवनों के निर्माण का काम तक शुरू नहीं हो सका है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की भर्ती न हो पाने के कारण सभी सेंटरों के संचालन का काम शुरू नहीं हो सका है।
सरकार की मंशा है कि ग्रामीण स्तर पर हेल्थ वेलनेस सेंटर की स्थापना करके मरीजों को इलाज के साथ ही अन्य चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराई जाए। जिले को अब तक 291 हेल्थ वेलनेस सेंटर मिले हैं, जिसमें विभाग अब तक 181 सेंटरों का ही संचालन करा सका है।
शेष 110 सेंटरों में 68 सेंटरों के भवनों के निर्माण का काम तक शुरू नहीं हो सका है, जबकि प्रत्येक सेंटर के भवन के निर्माण के लिए 5.70 लाख रुपये दे दिए गए हैं। करीब 42 सेंटरों के भवन तैयार हो गए हैं, लेकिन सीएचओ की तैनाती न होने के कारण इन सेंटरों का संचालन अब तक नहीं कराया जा सका है। सेंटरों पर चिकित्सीय संसाधनों की व्यवस्था तक नहीं हो सकी है।
जिले में कहने को तो 181 हेल्थ वेलनेस सेंटरों को संचालित करा दिया गया है, लेकिन सीएचओ के रोजाना न आने से सेंटर बंद ही रहते हैं। विभागीय अधिकारी भी इन सेंटरों का निरीक्षण करके मनमानी करने वाले सीएचओ पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे शासन की मंशा तार तार हो रही है और ग्रामीणों को गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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