रायबरेली/डीह। जलनिगम शहरी और ग्रामीण अफसरों की खींचतान से 65 पेयजल परियोजनाओं से जुड़े 350 गांवों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। इन गांवों के घरों में दो दिनों से टोटियों से एक बूंद पानी नहीं टपका है। इससे करीब एक लाख ग्रामीण बेहाल हैं। यह संकट 155 कर्मचारियों की विभाग वापसी से आया है। इस वजह से नलकूप बंद हो गए हैं, जिन्हें चलाने वाला कोई नहीं है।
जिले में जल निगम ग्रामीण की 101 पेयजल इकाईयां हैं। इसमें करीब 36 पानी की टंकियां ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दी गईं हैं। शेष 65 पानी की टंकियों का संचालन जल निगम ग्रामीण कर रहा है।
जल निगम ग्रामीण के पास परियोजनाओं को चलाने के लिए कर्मचारी नहीं हैं। सितंबर 2021 से जल निगम नगरीय के कर्मचारियों के भरोसे पानी की टंकियों का संचालन हो रहा था। इन टंकियों के जरिए करीब 350 गांवों में पानी की आपूर्ति होती है।
दो दिन पहले जल निगम नगरीय ने पानी की टंकियों से अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया। इससे पेयजल परियोजनाओं का संचालन ठप हो गया। विभागीय अफसरों की खींचतान से गांवों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। घरों की टोटियां सूखी पड़ी हैं। पानी के लिए हाहाकार मचा है।
12 सितंबर 2021 में हुआ था जल निगम का विभाजन
जिले में ग्रामीण अंचलों में बनी पानी की टंकियों और अन्य पेयजल परियोजनाओं की देखरेख जल निगम करता था। 12 सितंबर 2021 में जल निगम को दो भागों में बांट दिया गया। इसमें जल निगम ग्रामीण के पास ग्रामीण क्षेत्र और शहरी को सीवरेज का काम दे दिया गया।
खास बात यह है कि विभागों का बंटवारा तो कर दिया गया, लेकिन जल निगम ग्रामीण को कोई संसाधन नहीं दिए गए। कर्मचारियों की तैनाती भी नहीं की गई। जलनिगम ग्रामीण में तैनात कर्मचारी भी जल निगम नगरीय के थे। इनकी वापसी से पेयजल का संकट पैदा हुआ।
पूरे तरीके से नहीं हुए हैंडओवर, हटा लिए गए कर्मचारी
डिवीजन का विभाजन हुए 11 महीने का वक्त बीत गया, लेकिन जल निगम ग्रामीण को पानी की टंकियों को पूरी तरीके से हैंडओवर नहीं किया गया है। जल निगम ग्रामीण को केवल संचालन की जिम्मेदारी दे दी गई है, लेकिन पानी टंकी का इस्टीमेट, नक्शा, संशाधन समेत अन्य ब्योरा नहीं दिया गया है। इसके बावजूद कर्मचारियों को हटा लिया गया।
फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर
रायबरेली-डीह। जिले में करीब 50 गांव ऐसे हैं, जहां हैंडपंपों से फ्लोराइडयुक्त पानी निकलता है। सरेनी, खीरों, लालगंज क्षेत्र में पानी इतना खारा है, जो पीने योग्य नहीं है। लोग पानी की टंकियों का पानी ही प्रयोग करते हैं। पानी की आपूर्ति बंद होने से ग्रामीणों को दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। डीह ब्लॉक क्षेत्र के नारायनपुर, प्रधानपुर, टेकारी दादू, मऊ, आशापुर में हैंडपाइप फ्लोराइड युक्त पानी उगल रहे हैं। ग्रामीण जल निगम की टंकी से आने वाले पानी को ही पीते थे। पानी बंद हो जाने से इन गांव के ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है।
फरवरी में ही भेजा गया था पत्र
ग्रामीण अंचलों में 65 पानी की टंकियों से करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को पानी मिल रहा था। अभी तक जल निगम शहरी के कर्मचारियों के सहयोग से पानी की टंकियों का संचालन हो रहा था। अब शहरी डिवीजन की ओर से कर्मचारियों को हटा लिया गया है। इससे समस्या उत्पन्न हुई है। कर्मचारियों की तैनाती और मेंटेनेंस के लिए फरवरी 2022 में ही उच्चाधिकारियों और प्रशासन को पत्र भेजकर समस्या से अवगत करा दिया गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
मोहित विक्रम, एक्सईएन, जलनिगम ग्रामीण
11 महीने किया सहयोग, अब काम हो रहा प्रभावित
शहरी क्षेत्र में सीवर का काम चल रहा है। इसके लिए कर्मचारियों की कमी थी। इस वजह से कर्मचारियों को बुलाकर काम लिया जा रहा है। जलनिगम ग्रामीण का 11 महीने सहयोग किया है। अब हमारे डिवीजन का काम प्रभावित हो रहा है। इस वजह से कर्मचारियों को वापस बुलाकर काम पर लगाया गया है।
देवेंद्र कुमार, एक्सईएन, जलनिगम नगरीय