सीएमओ कार्यालय परिसर में लगे लाखों कीमत के कई हरे भरे पेड़ों को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने गुपचुप तरीके से कटवा कर मोटे दाम पर बेच डाला। इसके लिए वन विभाग से अनुमति लेना तो दूर पेड़ कटवाने की जानकारी तक देना मुनासिब नहीं समझा।
मामला उजागर हो जाने के बाद अब डीएफओ आशुतोष जायसवाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए साफ किया कि विभाग को पेड़ कटवाने के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई। बिना अनुमति सरकारी स्वामित्व के पेड़ नहीं काटे जा सकते हैं। इस लिए पूरे मामले की जांच होगी। दूसरी तरफ एसीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि इन पेड़ों के कारण नुकसान हो रहा था। इस लिए वन विभाग को सूचना देकर पेड़ों को कटवाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग परिसर में लगे कई बड़े और पुराने पेड़ों को एक-एक करके काटकर ठेकेदार उठा ले गए हैं। शनिवार को भी पेड़ों पर आरा चल रहा था। इसमें कई पेड़ पूरी तरह से हरे भरे भी थे। सीएमओ कार्यालय के पीछे परिसर में ही कंडम वाहन भी रखे हैं।
परिसर में काफी संख्या में पुराने और हरे भरे पेड़ भी लगे हैं। कई बार हुई कोशिश के बाद भी कंडम वाहनों को उठाने व पेड़ों की नीलामी की प्रक्रिया नहीं हो सकी। इसके बाद विभागीय अफसरों ने गुपचुप तरीके से हरे पेड़ों पर आरा चलवा दिया। इस दौरान नीम के कई पेड़ों की हरी भरी मोटी डाल भी काटकर ठेकेदार उठा ले गया। भवन के पीछे पेड़ों के निशान कटान के गवाह बने हैं।
इस संबंध में एसीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि परिसर में एएनएमटीसी का संचालन कराया गया है। पेड़ों के कारण इसके संचालन में परेशानी आने के साथ ही पेड़ गिरने से भवन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बढ़ गया था। इसी लिए सुरक्षा के दृष्टिगत इन पेड़ों को वन विभाग को सूचना देने के बाद कटवाया जा रहा है। दूसरी तरफ डीएफओ आशुतोष जायसवाल ने स्वास्थ्य विभाग के स्तर से पेड़ों की कटान के संबंध में कोई भी जानकारी देने अथवा अनुमति लेने की बात से साफ इंकार करते हुए कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी।